Parliament Session: लोकसभा में जनरल इंश्योरेंस बिजनेस नेशनलाइजेशन अमेंडमेंट बिल 2021 पारित

Updated: | Mon, 02 Aug 2021 06:54 PM (IST)

Parliament Monsoon Session: सोमवार को लोकसभा में विपक्षी दलों के शोर-शराबे के बीच ‘साधारण बीमा कारोबार (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक, 2021’ को मंजूरी मिल गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधेयक को चर्चा एवं पारित होने के लिये रखा। इस दौरान लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने विधेयक का विरोध किया। बाद में हंगामे के बीच ही बिल को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इस बिल के पारित होने के बाद अब सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की इंश्योरेंस कंपनियों का निजीकरण कर सकती है।

इस बिल में क्या है?

इस विधेयक के माध्यम से साधारण बीमा कारोबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम में संशोधन किया गया। यह अधिनियम 1972 में लागू हुआ था और इसमें साधारण बीमा कारोबार के विकास के जरिये अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय बीमा कंपनियों और अन्य मौजूदा बीमा कंपनियों के शेयरों के अधिग्रहण और हस्तांतरण की अनुमति का प्रावधान किया गया था।

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों में अधिक निजी भागीदारी का उपबंध करने, बीमा पहुंच में वृद्धि करने, सामाजिक संरक्षण एवं पॉलिसीधारकों के हितों को बेहतर रूप से सुरक्षित करने तथा अर्थव्यवस्था की तीव्र वृद्धि में अंशदान करने के लिये अधिनियम के कुछ उपबंधों का संशोधन करना आवश्यक हो गया था ।

आगे क्या होगा?

30 जुलाई को लोकसभा में जनरल इंश्योरेंस बिजनेस नेशनलाइजेशन अमेंडमेंट बिल 2021 (GIBNA Act) पेश किया गया था, जिसे सोमवार को मंजूरी मिल गई। इस जिस बिल को पारित करने से सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र की जनरल इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण की अनुमति मिल गई है। जनरल इंश्योरेंस लॉ 1972 के मुताबिक, किसी भी जनरल इंश्योरेंस कंपनी में सरकार अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी से घटा नहीं सकती है। लेकिन GIBNA बिल 2021 को मंजूरी मिल जाने के बाद जनरल इंश्योरेंस कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम हो सकती है।

बजट में निर्मला सीतारमण ने दो सरकारी बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण का ऐलान किया था। दोनों काम के लिए कानूनी संशोधन की जरूरत थी, जिसमें से एक का रास्ता साफ हो गया है। फिलहाल पब्लिक सेक्टर की चार इंश्योरेंस कंपनियां अस्तित्व में हैं। ये हैं - नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी। इन चार कंपनियों में से किसी एक का निजीकरण किया जाएगा। फिलहाल किसी कंपनी का चयन नहीं किया गया है। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने विनिवेश और निजीकरण का लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ रुपए रखा है। वैसे, सूत्रों के मुताबिक कोरोना महामारी की वजह से चालू वित्त वर्ष में इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण की संभावना कम ही है।

Posted By: Shailendra Kumar