AIIMS एम्स और IIT जोधपुर ने बनाया टॉकिंग ग्लब्स, स्पीच डिसेबल लोगों को मिलेगी बोलने की क्षमता

Updated: | Mon, 29 Nov 2021 10:25 PM (IST)

जोधपुर, 29 नवंबर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(IIT) जोधपुर और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) जोधपुर के इनोवेटर्स ने स्पीच डिसेबल लोगों के लिए कम लागत वाले 'टॉकिंग ग्लव्स' विकसित किए हैं। ये ग्लब्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) के सिद्धांतों पर आधारित है और स्वचालित रूप से लैंग्वेज स्पीच उत्पन्न करने का काम करेगा। यह डिवाइस मूक लोगों और सामान्य लोगों के बीच संचार माध्यम की सुविधा प्रदान करेगा। आईआईटी जोधपुर और एम्स जोधपुर से पेटेंट कराया गया यह इनोवेशन, इस क्षेत्र में चल रहे कार्य की दिशा में एक बड़ा कदम है।

आईआईटी जोधपुर के सहायक प्रोफेसर, कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. सुमित कालरा, ने कहा की , "भाषा-स्वतंत्र स्पीच पीढ़ी डिवाइस बिना किसी लैंग्वेज बाधा के लोगों को आज के वैश्विक युग में मुख्यधारा में वापस लाएगा। डिवाइस के उपयोगकर्ताओं को इसे केवल एक बार सीखने की जरूरत है और फिर वे अपने ज्ञान के साथ किसी भी भाषा में मौखिक रूप से संवाद करने में सक्षम हो सकेंगे। इसके अतिरिक्त, डिवाइस को मरीजों की मूल आवाज के समान आवाज उत्पन्न करने के लिए अनुकूलित किया जा सकता है. जो डिवाइस का उपयोग करते समय इसे और अधिक प्राकृतिक बनाता है। विकसित डिवाइस की कीमत पांच हजार रुपये से भी कम है।"

विकसित उपकरण व्यक्तियों को हाथ के इशारों को टेक्स्ट या पहले से रिकॉर्ड की गई आवाजों में बदलने में मदद कर सकता है। विभिन्न परिस्थितियों के कारण जिन लोगों को कोई बीमारी या चोट लगने के कारण जिनकी मौखिक रूप से संवाद करने की प्राकृतिक क्षमता से वंचित होना पड़ा है या जो बोलने में असमर्थ हैं, उनके लिए सांकेतिक भाषा ही बातचीत का एक तरीका है। लेकिन ये डिवाइस के जरिए व्यक्ति अपनी बात को प्रभावी ढंग से संप्रेषित कर सकता है।

आईआईटी टीम इस डिवाइस के टिकाऊपन, वजन, प्रतिक्रियात्मकता और उपयोग में आसानी जैसी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए आगे काम कर रही है। विकसित उत्पाद को IIT जोधपुर द्वारा इनक्यूबेट किए गए स्टार्टअप के माध्यम से मार्केट में उतारा जाएगा।

इस तरह डिवाइस करता है काम

इस उपकरण में विद्युत संकेत सेंसर के पहले सेट द्वारा उत्पन्न होते हैं, जो उपयोगकर्ता के पहले हाथ की अंगूठे, उंगली और/या कलाई के संयोजन पर पहनने होते हैं। ये विद्युत संकेत उंगलियों, अंगूठे, हाथ और कलाई की गति के संयोजन से उत्पन्न होते हैं। इसी तरह, दूसरी ओर सेंसर के दूसरे सेट से भी विद्युत संकेत उत्पन्न होते हैं। ये संकेतों के इन संयोजनों को वाक्य और शब्दों के अनुरूप ध्वन्यात्मकता में अनुवादित करता है। संकेतों का निर्माण, स्पीच के जरिये मूक लोगों को दूसरों के साथ श्रव्य रूप से संवाद करने में सक्षम बनाता है।

Posted By: Shailendra Kumar