MRSAM Missile : वायु सेना में शामिल हुआ MRSAM मिसाइल, कार्यक्रम में रक्षा मंत्री भी हुए शामिल

Updated: | Thu, 09 Sep 2021 10:24 PM (IST)

जोधपुर, 9 सितम्बर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को राजस्थान में आधिकारिक तौर पर मध्यम दूरी के जमीन से आसमान में मार करने वाले मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को भारतीय वायुसेना को सौंपा। मध्यम दूरी के जमीन से आसमान में मार करने वाले इस मिसाइल (मीडियम रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल-MRSAM) की विशेषता ये है कि यह 360 डिग्री घूम कर दुश्मन पर हमला कर उसे नेस्तनाबूद कर सकती है। जैसलमेर सैन्य क्षेत्र में हुए इस कार्यक्रम में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वायुसेना के एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया भी मौजूद रहे। राजस्थान के बाड़मेर जालोर में इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप को देश को समर्पित करने के बाद रक्षा मंत्री जैसलमेर पहुंचे, जहां उन्होंने इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्री और रक्षा अनुसंधान विकास संगठन के द्वारा संयुक्त रूप से विकसित इस मिसाइल को आधिकारिक रूप से भारतीय सेना के बेड़े में शामिल किए जाने के कार्यक्रम में शिरकत की।

इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित मिसाइल की खासियत यह है कि यह हवा में एक साथ आने वाले कई टारगेट या दुश्मनों पर 360 डिग्री घूम कर एक साथ हमला कर सकती है। राजनाथ सिंह ने जैसलमेर के एयरफोर्स में ही एमआरएसएएम मिसाइल बेस का उद्घाटन भी किया। इसके बाद रक्षा मंत्री ने वहां तैनात जवानों से चर्चा की और उनकी हौसलाअफजाई की।

पश्चिमी सीमा पर बढ़ेगी ताकत

पाकिस्तान से सटे देश के पश्चिमी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इस मिसाइल के तैनात होने से इस क्षेत्र में सेना की ताकत और बढ़ेगी। 70 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता रखने वाली और 360 डिग्री पर लक्ष्य को साधने वाली इस मिसाइल के तैनात होने से अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर और विशेषकर पाकिस्तान से सटी सीमा पर भारतीय सेना को और अधिक मजबूती मिलेगी, जो दुश्मन की मिसाइलों और उनके विमानों को भेदने में सहायक साबित होगी।

ये है विशेषताएं

इसे इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा संयुक्त रूप विकसित किया गया है।

यह हवा में एक साथ आने वाले कई टारगेट या दुश्मनों पर 360 डिग्री घूम कर एक साथ हमला कर सकती है।

यह मिसाइल 70 किलोमीटर के दायरे में आने वाली किसी भी मिसाइल, लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, निगरानी विमानों और हवाई शत्रुओं को मार गिराने में सक्षम है।

मिसाइल का 17 मई 2019 को नौसेना के जहाज से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था।

Posted By: Shailendra Kumar