बाटु केव्स में रहते हैं श्री गणेश जी के बड़े भाई मुरुगन
Updated: | Wed, 23 Sep 2015 08:40 PM (IST)- पायल शर्मा, मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से...
सांस्कृतिक विविधता वाला देश मलेशिया यूं तो एक मुस्लिम बहुल राष्ट्र है, लेकिन अन्य धर्मो के प्रति यह हमेशा उदार रहा है। यहां मलय, चीनी व भारतीय सभ्यताओं का अद्भुत मिश्रण है। पारंपरिक शैली में बनी मस्जिदें हों या बौद्ध मंदिर सभी पर्यटकों के बीच आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहते हैं।
ऐसा ही एक दर्शनीय स्थल है बाटु केव्स (बाटु गुफाएं) जो हिंदुओं की आस्था व मान्यताओं का केंद्र है। प्राचीन समय में नजदीक से गुजरने वाली एक नदी सुंगई बातु (पथरीली नदी) के नाम पर ही इन गुफाओं का नाम बाटु केव्स पड़ा।
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राजधानी कुआलालंपुर से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चूना पत्थर (लाइमस्टोन) की ये गुफाएं लगभग 40 करोड़ वर्ष पुरानी हैं। इन्हीं में से सबसे बड़ी प्रमुख गुफा में स्थित है भगवान मुरुगन(कार्तिकेय जी) यानी भगवान श्री गणेश जी के बड़े भाई का प्राचीन मंदिर।
यह मंदिर सतह से करीब 400 फुट की ऊंचाई पर बना 113 वर्ष पुराना है। मंदिर तमिल हिंदुओं का प्रमुख तीर्थस्थल है। भगवान के दर्शन के लिए श्रृद्धालु 272 सीढ़ियां चढ़कर गुफा तक पहुंचते हैं। मंदिर को चारों तरफ से घेरे हुए चूना पत्थर के पहाड़ ऊपर से संकरे होते चले जाते हैं।
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पहाड़ों की ऊंचाई और चट्टानों के बीच से जगह पाकर निकल आए पेड़ों की वजह से सूरज की रोशनी मंदिर परिसर तक बहुत ही कम पहुंच पाती है। बारिश के मौसम में पेड़ों से छन कर गिरने वाली बारिश की बूंदे अद्भुत नजारा पेश करती हैं। गुफा पूरी तरह से प्राकृतिक अवस्था में है।
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हालांकि कृत्रिम प्रकाश द्वारा रोशनी की गई है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 1920 तक लकड़ी से बनी सीढ़ियां थी जिन्हें बाद में सीमेंट से पक्का कर दिया गया। ये गुफाएं पर्यटकों के लिए प्रतिदिन खुलती हैं। यहां आने वाले लोग गुफाओं व मंदिर के इतिहास के बारे में यहां लगी अनेक पट्टिकाओं द्वारा जान सकते हैं।