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Om Jai Jagdish Hare aarti लिखने वाले श्रद्धाराम फिल्लौरी की पुण्य तिथि, जानिए उनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें

Updated: | Thu, 24 Jun 2021 10:43 AM (IST)

Om Jai Jagdish Hare aarti: भगवान सत्यनारायण की कथा या ​भगवान विष्णु की पूजा के दौरान ॐ जय जगदीश हरे आरती जरूर गाई जाती है। यह आरती गाने में बहुत ही आसान है और इसके शब्द ऐसे हैं कि यह आरती सुनने के बाद आपके मन को शांति मिलती है। इस आरती का हर शब्द भक्त की भावना को भगवान तक पहुंचाता है। यही वजह है कि यह आरती सभी भक्तों को भाव विभोर कर देती है। लेकिन कुछ ही लोगों को पता है कि यह आरती किसने लिखी है। यहां हम आपको उसी भक्त के बारे में बता रहे हैं, जो यह आरती लिखकर अमर हो गया।

'ॐ जय जगदीश हरे' आरती पंजाब के फिल्‍लौर में जन्‍मे श्रद्धाराम शर्मा ने लिखी थी। उनका ताल्लुक फिल्लौर से था। इसलिए वो श्रद्धाराम फिल्लौरी के नाम से प्रचलित हो गए। आज पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी की ​पुण्य तिथि है। इस मौके पर हम आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बातें बता रहे हैं।

देशवासियों के अंदर क्रांति की अलग जगाते थे

श्रद्धाराम फिल्लौरी का जन्म 30 सितंबर 1837 को पंजाब के लुधियाना के फिल्लौर गांव में हुआ था। वो एक धर्म प्रचारक होने के साथ-साथ ज्योतिषी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संगीतज्ञ और हिंदी और पंजाबी के प्रसिद्द साहित्यकार भी थे। श्रद्धाराम फिल्लौरी अपनी कथा में लोगों की भीड़ को इकट्ठा करके अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जन जागरण अभियान चलाया करते थे और देशवासियों के अंदर क्रांति की अलख जगाते थे।

अंग्रजों ने गांव से निकाला था

पंडित श्रद्धाराम एक लेखक भी थे। उन्होंने अपनी किताबों के जरिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बगावती माहौल तैयार किया। महाभारत के किस्से सुनाते हुए श्रद्धाराम लोगों में अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा होने की हिम्मत जगाया करते थे। इस वजह से अंग्रेजी हुकूमत उनसे चिढ़ गई और सन 1865 में उन्हें उनके ही गांव से निष्काषित कर दिया गया। इसके साथ ही आसपास के गांवों में भी उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी।

कैसे लिखी कालजयी आरती

ऐसा माना जाता है कि सन् 1870 में गांव से निष्कासित होने के बाद उन्होंने ॐ जय जगदीश हरे आरती की रचना की थी। इस आरती की रचना के पीछे भी एक रोचक किस्सा बताया जाता है। पंडित जी एक समय पर पूरे पंजाब में घूम-घूम कर लोगों को रामायण, महाभारत और भागवत कथा सुनाते थे। एक बार उन्होंने महसूस किया कि उनके व्याख्यानों को सुनने के लिए लोग सही समय पर नहीं आते हैं। इसके बाद उन्होंने एक अच्छी आरती या प्रार्थना लिखने की सोची ताकि लोग आकर्षित हो सकें। इसके बाद ही श्रद्धाराम फिल्लौरी ने नारायण को समर्पित ॐ जय जगदीश हरे आरती लिखी।

कैसे पूरे देश में प्रचलित हुई यह आरती

भागवत कथा के दौरान श्रद्धाराम फिल्लौरी ॐ जय जगदीश हरे आरती को गाया करते थे। इससे उनकी और उनकी आरती की लोकप्रियता तेजी से बढ़ने लगी। देश के तमाम हिस्सों से लोग उन्हें सत्संग में बुलाने लगे। इस आरती ने लोगों के अंदर छिपी भक्ति की भावना को शब्दों का रूप दिया। इसके बाद लोग एक दूसरे को यह आरती सुनाने लगे और इसी की मदद से पूजा करने लगे। धीरे-धीरे करके यह आरती पूरे देश में प्रचलित हो गई।

न्यूटन की मदद से हुई थी घर वापसी

पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी के ज्ञान से पादरी फादर न्यूटन काफी प्रभावित थे। न्यूटन उनका बहुत सम्मान करते थे। इसीलिए जब उन्हें पता चला कि पंडित जी के गांव से निकाले जा चुके हैं। तो उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को बहुत समझाया। इसके बाद पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी की दोबारा घर वापसी हुई।

बचपन से ही मेधावी थे पंडित श्रद्धाराम

पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी बचपन से ही काफी मेधावी थे। उन्होंने सात साल की उम्र तक गुरुमुखी में पढाई की। दस साल की उम्र में संस्कृत, हिन्दी, फ़ारसी और ज्योतिष की पढ़ाई शुरु की और कुछ ही वर्षो में वे इन सभी विषयों के ज्ञाता बन गए। हिन्दी साहित्य के पहले उपन्यास भाग्यवती का रचनाकार पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी को ही माना जाता है। इसके अलावा भी उन्होंने अनेक रचनाएं कीं। 24 जून 1881 में इस महान विभूति ने अपनी अंतिम सांस ली।

Posted By: Arvind Dubey
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