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Dev Deepawali 2020: कार्तिक पूर्णिमा पर दीपावली मनाने काशी आते हैं देवी-देवता

Updated: | Mon, 30 Nov 2020 03:23 PM (IST)

Dev Deepawali 2020: हिन्दी पंचांग के अनुसार, हर वर्ष कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को देव दीपावली मनाई जाती है। देव दीपावली हर वर्ष काशी में मनाए जाने की परंपरा है। इस वर्ष देव दीपावली 29 नवंबर दिन रविवार को है। मान्यता है कि देव दीपावली के दिन सभी देवता बनारस के घाटों पर आते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध किया था। त्रिपुरासुर के वध के बाद सभी देवी-देवताओं ने मिलकर खुशी मनाई थी। पुराणों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर ही भगवान विष्णु ने धर्म, वेदों की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था।

जबलपुर के ज्‍योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे बताते हैं कि काशी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस दिन दीपदान करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि भगवान शंकर ने खुद देवताओं के साथ गंगा के घाट पर दिवाली मनाई थी, इसीलिए देव दीपावली का धार्मिक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी बढ़ जाता है।

हिंदू धर्म में कार्तिक का महीना बहुत ही विशेष होता है क्योंकि इस महीने में सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार महीने के बाद योग निद्रा से जागते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी से भगवान विष्णु चार मास के लिए योग निद्रा में लीन होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागने पर सभी देवता प्रसन्न होते हैं। इस खुशी में देवी-देवताओं ने पूर्णिमा को लक्ष्मी-नारायण की महाआरती करके दीप प्रज्‍ज्वलित किए। यह दिन देवताओं की दीपावली है।

देव दीपावली का उत्सव दीवाली के 15 दिन बाद आता है। दीवाली कार्तिक अमावस्या के दिन तथा देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा को होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवी-देवता देव दीपावली मनाने के लिए काशी जाते हैं। देव दीपावली के दिन संध्या के समय में गंगा पूजन एवं आरती होती है तथा काशी के सभी घाटों को दीपकों से रोशन किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन दान, स्नान, उपासना और यज्ञ का अनंत फल प्राप्त होता है। कार्तिक पूर्णिमा को सायंकाल में मत्स्यावतार हुआ था, इसलिए इस दिन दान करने से 10 यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है।

29 को सुबह 11:37 बजे से पूर्णिमा:

कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 29 नवंबर को दोपहर 11 बजकर 37 मिनट से हो रहा है, जो 30 नवंबर दिन सोमवार को दोपहर 03 बजकर 11 मिनट तक है। ऐसे में देव दीपावली 29 नवंबर दिन रविवार को मनाई जाएगी। देव दीपावली के दिन पूजा के लिए शाम का समय श्रेष्ठ है। 29 नवंबर को शाम 5 बजकर 13 मिनट से शाम 07 बजकर 54 मिनट के बीच देव दीपावली की पूजा संपन्न करना श्रेस्यकर रहेगा।

Posted By: Arvind Dubey
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