काल भैरव जयंती पर पढ़ें हिंदी और मराठी आरती, जानिए आसान मंत्र, जपें काल भैरव अष्टक

Updated: | Sat, 27 Nov 2021 09:01 AM (IST)

काल भैरव जयंती हिंदी और मराठी आरती: शनिवार को काल भैरव जयंती मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर काल भैरव जयंती मनाई जाती है। काल भैरव भगवान शिव के ही अवतार हैं। इसलिए भी इनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन काल भैरव के मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है, पूजा होती है, भोग लगाया जाता और आरती उतारी जाती है। यहां पढ़िए काल भैरव के मंत्र, अष्टक, हिंदी तथा मराठी आरती।

काल भैरव मंत्र

ओम कालभैरवाय नम:। ओम ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं। ओम भ्रं कालभैरवाय फट्। जय भैरव देवा, प्रभु जय भैंरव देवा।

काल भैरव अष्टक

देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् ।

नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ १॥

भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम् ।

कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ २॥

शूलटंकपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् ।

भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ३॥

भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम् ।

विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥ ४॥

धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशनं कर्मपाशमोचकं सुशर्मधायकं विभुम् ।

स्वर्णवर्णशेषपाशशोभितांगमण्डलं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ५॥

रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरंजनम् ।

मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ६॥

अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसंततिं दृष्टिपात्तनष्टपापजालमुग्रशासनम् ।

अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ७॥

भूतसंघनायकं विशालकीर्तिदायकं काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम् ।

नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ८॥

॥ फल श्रुति॥

कालभैरवाष्टकं पठंति ये मनोहरं ज्ञानमुक्तिसाधनं विचित्रपुण्यवर्धनम् ।

शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनं प्रयान्ति कालभैरवांघ्रिसन्निधिं नरा ध्रुवम् ॥

॥इति कालभैरवाष्टकम् संपूर्णम् ॥

भगवान श्री कालभैरव की हिंदी आरती

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैंरव देवा।

जय काली और गौरा देवी कृत सेवा।।

तुम्हीं पाप उद्धारक दुख सिंधु तारक।

भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।।

वाहन शवन विराजत कर त्रिशूल धारी।

महिमा अमिट तुम्हारी जय जय भयकारी।।

तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होंवे।

चौमुख दीपक दर्शन दुख सगरे खोंवे।।

तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी।

कृपा करिए भैरव करिए नहीं देरी।।

पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू डमकावत।।

बटुकनाथ बन बालक जन मन हर्षावत।।

बटुकनाथ जी की आरती जो कोई नर गावें।

कहें धरणीधर नर मनवांछित फल पावें।।

भगवान श्री कालभैरव की मराठी आरती

आरती ओवाळू भावें, श्री काळभैरावाला ||

दिनदयाळा भक्तवत्सला, प्रसन्न हो मजला ||

देवा, प्रसन्न हो मजला || धृ ||

धन्य तुझा अवतार जागी, या रौद्ररुपधारी |

उग्र भयंकर भव्य मुर्ति, परि भक्तांसी तारी |

काशीक्षेत्री वास तुझा, तू तिथला अधिकार |

तुझिया नामस्मरणे, पळती पिशाच्चादि भारी ||

पळती पिशाच्चादि भारी II आरती .....|| १ ||

उपासकां वरदायक होसी, ऐसी तव कीर्ती |

क्षुद्र जीव मी अपराधांना, माझ्या नच गणती |

क्षमा करावी, कृपा असावी, सदैव मजवरती |

मिलींदमाधव म्हणे देवा, घडो तुझी भक्ती ||

देवा घडो तुझी भक्ती II आरती .... || २ ||

Posted By: Arvind Dubey