Radha Ashtami 2021: राधा अष्टमी आज, जानिए टाइमिंग, पूजा मुहूर्त, विधि और पूजन सामग्री

Updated: | Tue, 14 Sep 2021 07:34 AM (IST)

Radha Ashtami 2021: हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी की तिथि को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि सोमवार को दोपहर 3 बजकर 10 मिनट पर शुरू होगी और मंगलवार को दोपहर 1 बजकर 9 मिनट पर समाप्त होगी। मान्यता के अनुसार राधा अष्टमी व्रत के बिना कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का फल नहीं मिलता है। इसलिए कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले लोग राधा अष्टमी का व्रत जरूर रखते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी की तरह राधा अष्टमी की व्रत भी राधा के जन्मदिन पर मनाया जाता है।

राधा अष्टमी का महत्व

हिंदू धर्म में मान्यता है कि राधा की पूजा के बिना श्री कृष्ण की पूजा अधूरी रहती है। इसलिए श्री कृष्ण के साथ राधा रानी का नाम अवश्य लिया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत का फल पाने के लिए राधा अष्टमी का व्रत भी उतना ही जरूरी है, जितना कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत। राधा अष्टमी की पूजा सभी दुखों को दूर करने वाली मानी गई है। राधा अष्टमी का व्रत सभी प्रकार के पापों को भी नष्ट करता है। इस दिन पूजा करने से भगवान श्री कृष्ण अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देते हैं। इससे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और धन की समस्या की भी दूर होती है

राधा अष्टमी व्रत के शुभ मुहूर्त

राधा जन्माष्टमी 2021- 14 सितंबर 2021, मंगलवार,

अष्टमी तिथि प्रारंभ: 13 सितंबर 2021 दोपहर 03:10 बजे

अष्टमी तिथि समाप्त: 14 सितंबर 2021 दोपहर 01:09 बजे

राधा अष्टमी पूजा विधि

राधा अष्टमी के दिन प्रातः काल स्नान आदि से निवृत होकर मंडप बनाया जाता है, मंडल बनाकर उसके नीचे तांबे का कलश स्थापित करें। कलश पर तांबे का पात्र रखें और इस पर राधाजी की की मूर्ति स्थापित कर उसे श्रृंगार कराए। इसके बाद राधाजी का षोडशोपचार से पूजन करें। अब विधि विधान पूर्वक पूजन करके पूरा दिन उपवास रखें। दूसरे दिन श्रद्धापूर्वक सुहागिन महिलाओं को या ब्राह्मणों को भोजन कराकर सामर्थ अनुसार दक्षिणा प्रदान करें।

राधा अष्टमी पूजन सामग्री

राधा अष्टमी की पूजा की विधि बहुत हद तक कृष्ण जन्माष्टमी की तरह ही होती है और इसमें पूजा के दौरान किसी विशेष चीज की जरूरत नहीं पड़ती। राधा कृष्ण की मूर्ति के अलावा धूप,दीप,रोली,फल,फूल,माला,नैवेद्य और तांबे का कलश इस पूजा में जरूरी होता है। इसके अलावा राधा रानी के श्रंगार के लिए सिंदूर, चंदन, हल्दी और चावल की जरूरत होती है।

Posted By: Arvind Dubey