Sankashti Chaturthi 2021: संकष्‍टी चतुर्थी 24 सितंबर को मनाई जाएगी, जानिये समय, पूजा विधि, मुहूर्त एवं महत्‍व

Updated: | Thu, 23 Sep 2021 11:32 PM (IST)

Sankashti Chaturthi 2021: भगवान गणेश को व्यापक रूप से ज्ञान और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। हिंदी पंचांग के अनुसार संकष्टी चतुर्थी कल, 24 सितंबर को पड़ रही है। संकष्टी का मतलब कठिनाइयों से मुक्ति होता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश भक्तों की समस्याओं को कम करते हैं और बाधाओं को दूर करते हैं। भगवान गणेश विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता है। विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का व्रत रखने और पूजन करने से जीवन के दुख और संकटों का नाश होता है और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। आइये जानते हैं संकष्‍टी चतुर्थी का शुभ समय, पूजा विधि, महत्‍व एवं मुहूर्त आदि।

क्‍या है संकष्‍टी चतुर्थी

हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार हर महीने संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष के चौथे दिन मनाई जाती है। इस दिन, भक्त सुखी जीवन के लिए आशीर्वाद लेने के लिए भगवान गणेश की पूजा करते हैं। साथ ही, हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने अपने पुत्र गणेश का नाम सभी देवताओं से श्रेष्ठ रखा था। पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन स्वयं भगवान विष्णु ने भगवान गणेश का पूजन कर उन्हें प्रथम पूज्य देव माना था। इसी कारण हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या पूजन में सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन किया जाता है।

संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहुर्त

अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी 24 सितंबर के दिन यानि शुक्रवार को प्रात: 08 बजकर 29 मिनट पर प्रारंभ होगी. इसका समापन 25 सितंबर के दिन शनिवार को प्रात: 10 बजकर 36 मिनट पर होगा।

आश्विन मास की संकष्टी चतुर्थी के मुहूर्त-

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 24 सितंबर, शुक्रवार को प्रात: 08.29 मिनट पर होगा और 25 सितंबर, शनिवार को सुबह 10.36 मिनट इसका समापन होगा।

चंद्र दर्शन- 24 सितंबर को चंद्रोदय का समय रात 08.20 मिनट रहेगा, इस समय पर आप चंद्रमा का दर्शन कर सकते हैं।

राहुकाल का समय- 10.42 मिनट से दोपहर 12.13 मिनट तक रहेगा।

संकष्टी चतुर्थी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग

इस बार संकष्टी चतुर्थी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। 24 सितंबर को प्रात: 06.10 मिनट से सुबह 08.54 मिनट तक सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा। इस दिन अभिजित और विजय मुहूर्त के संयोग भी बन रहे हैं। 24 सितंबर को दिन में 11.49 मिनट से दोपहर 12.37 मिनट तक अभिजित मुहूर्त रहेगा और दोपहर 02.14 मिनट से दोपहर 03.02 मिनट तक विजय मुहूर्त बन रहा है, अत: इन मुहूर्त में आप श्री गणेश जी की पूजा कर सकते हैं।

संकष्टी चतुर्थी 2021: महत्व

संकष्टी का संस्कृत अर्थ संकट हारा या बाधाओं और प्रतिकूल समय से मुक्ति है। भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए संकष्टी चतुर्थी को सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, इस दिन भगवान शिव ने अपने पुत्र गणेश को सभी देवताओं में श्रेष्ठ घोषित किया था। भगवान गणेश की पूजा किसी भी अनुष्ठान की शुरुआत, या एक नए उद्यम की शुरुआत से पहले की जाती है। उन्हें ज्ञान के देवता के रूप में भी पूजा जाता है और लोकप्रिय रूप से विघ्नहर्ता (सभी बाधाओं को दूर करने वाले) के रूप में जाना जाता है।

संकष्टी चतुर्थी 2021: पूजा विधि

- सुबह जल्दी उठकर गणेश जी को जल चढ़ाकर उनकी पूजा करें।

- दिन भर उपवास रखें क्योंकि ऐसा माना जाता है कि सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

- दिन में किसी भी रूप में चावल, गेहूं और दाल का सेवन करने से बचें।

- शाम के समय दूर्वा घास, फूल, अगरबत्ती और दीया से भगवान गणेश की पूजा करें।

- पूरी पूजा विधि का पालन करते हुए गणेश मंत्रों का जाप करें।

- अब मोदक और लड्डू चढ़ाएं जो भगवान गणेश को सबसे ज्यादा पसंद हैं।

- चांदनी से पहले गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ किया जाता है।

- चंद्रोदय के बाद व्रत तोड़ें। चंद्रमा का दिखना बहुत ही शुभ होता है। इसलिए जब चंद्रमा दिखाई दे तो अर्घ्य दें।

- लोकप्रिय मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को तुलसी पसंद नहीं थी, इसलिए उनकी पूजा करते समय कभी भी इसके पत्ते न चढ़ाएं।

Posted By: Navodit Saktawat