Shraddh Paksh 2021: किस समय किया गया श्राद्ध होता है श्रेष्ठ, जानिए सर्वश्रेष्ठ योग के बारे में

Updated: | Fri, 24 Sep 2021 08:32 AM (IST)

Shraddh Paksh 2021: भारतीय संस्कृति में अपने से वरिष्ठजनों के सम्मान का और अपने से छोटों को स्नेह देने की परंपरा का भाव छिपा हुआ है। जीवित रहते हुए परिजनों को सम्मान दिया जाता है और देहलोकगमन के बाद उनकी स्मृति में विविध प्रकार के कर्मकांड किए जाते हैं। ये सभी कर्मकांड पितृों के प्रति सम्मान प्रगट करने के लिए किए जाते हैं। इन्ही पितृ समर्पित कर्मकांडों में से एक है श्राद्ध। सोलह दिनों तक चलने पितृपक्ष के दिनों में पितृों की स्मृति में श्राद्ध किया जाता है।

अब यह भी सवाल उठता है कि श्राद्ध कब किया जाए? पितृपक्ष के इन सोलह दिनों में श्राद्ध करने से अनन्त गुना फ़ल प्राप्त होता है एवं पितृगण संतुष्ट होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। देवकर्म को सुबह और शास्त्रों के मुताबिक ब्रह्ममुर्हूत में करने का प्रावधान है। इसी तरह पितृकर्म यानी श्राद्ध करने का शास्त्रोक्त समय दोपहर को माना गया है।

कुतप काल में श्राद्ध

पितृपक्ष के सोलह दिनों में कुतप काल में श्राद्धकर्म करना चाहिए। अब हम जानते हैं कुतप काल के संबंध में। दिन के आठवे मुहूर्त को कुतप काल कहा जाता है। दोपहर 11 बजकर 36 मिनट से लेकर 12 बजकर 24 मिनट तक का समय श्राद्ध कर्म के विशेष शुभ होता है। दिन के इस खास समय में पितृगणों के निमित्त धूप डालकर, तर्पण, दान व ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए।

गजच्छाया योग में श्राद्ध

शास्त्रों में गजच्छाया योग में श्राद्ध कर्म करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस योग में श्राद्ध कर्म करने से अनन्त गुना फ़ल मिलता है। गजच्छाया योग सालों बाद बनता है और इसमें श्राद्ध का अक्षय फल प्राप्त होता है। यह योग तब बनता है जब सूर्य हस्त नक्षत्र पर हो और त्रयोदशी के दिन मघा नक्षत्र होता है। यदि यह योग महालय यानी श्राद्धपक्ष के दिनों में बन जाए तो अत्यंत शुभ होता है।

Posted By: Yogendra Sharma