Utpanna Ekadashi 2021: उत्पन्ना एकादशी आज, जानिए शुभ मुहूर्त, नियम और पूजा विधि

Updated: | Tue, 30 Nov 2021 09:38 AM (IST)

Utpanna Ekadashi 2021: हर महीने की एकादशी तिथि अलग-अलग नामों से जानी जाती है। मार्गशीर्ष महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष उत्पन्ना एकादशी 30 नवंबर (मंगलवार) को है। पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन माता एकादशी ने दैत्य मुर का वध किया था। अन्य एकादशी व्रत की तरह उत्पन्ना एकादशी उपवास रखने के कुछ नियम है। जिनका पालन करना जरूरी है। आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी का शुभ मुहूर्त, व्रत नियम और पूजा विधि।

उत्पन्ना एकादशी व्रत मुहूर्त:

- उत्पन्ना एकादशी तिथि: 30 नवंबर 2021, मंगलवार, सुबह 04.13 मिनट से शुरू

- उत्पन्ना एकादशी समापन: 1 दिसंबर 2021, बुधवार, मध्यरात्रि 02.13 मिनट तक

- पारण तिथि हरि वासर समाप्ति: 1 दिसंबर, सुबह 07.37 मिनट तक

उत्पन्ना एकादशी व्रत नियम

उत्पन्ना एकादशी के दिन भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत रखना चाहिए। वह विधि-विधान से पूजा की जाती है। यह उपवास दो प्रकार से रखा जाता है। पहले निर्जला और दूसरा फलाहरी।

उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि

उत्पन्ना एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। फिर भगवान विष्णु को अर्घ्य देकर दिन की शुरूआत करें। अर्घ्य के जल में सिर्फ हल्दी का उपयोग करें। शाम के समय श्रीकृष्ण की पूजा करें और फलों का भोग लगाएं।

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार स्वयं श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशी माता के जन्म की कथा सुनाई थी। धर्मराज युधिष्ठिर के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण से पुण्यमयीएकादशी तिथि की उत्पत्ति के विषय पर पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि सत्ययुग में मुर नामक भयंकर दानव ने देवराज इन्द्र को पराजित करके जब स्वर्ग पर अपना आधिपत्य जमा लिया। तब सब देवता शिवजी के पास पहुंचे। महादेवजी देवगणों को साथ लेकर क्षीरसागर गए। वहां शेषनाग की शय्यापर योग-निद्रालीन भगवान विष्णु को देखकर देवराज इन्द्र ने उनकी स्तुति की। देवताओं के अनुरोध पर श्रीहरिने उस अत्याचारीदैत्य पर आक्रमण कर दिया। सैकडों असुरों का संहार करके नारायण बदरिकाश्रमचले गए। वहां वे बारह योजन लम्बी सिंहावतीगुफामें निद्रालीनहो गए। दानव मुर ने भगवान विष्णु को मारने के उद्देश्य से जैसे ही उस गुफामें प्रवेश किया, वैसे ही श्रीहरिके शरीर से दिव्य अस्त्र-शस्त्रों से युक्त एक अति रूपवती कन्या उत्पन्न हुई। उस कन्या ने अपने हुंकार से दानव मुर को भस्म कर दिया। नारायण ने जगने पर पूछा तो कन्या ने उन्हें सूचित किया कि वध उसी ने किया है। इससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने एकादशी नामक उस कन्या को मनोवांछित वरदान देकर उसे अपनी प्रिय तिथि घोषित कर दिया। श्रीहरिके द्वारा अभीष्ट वरदान पाकर परम पुण्यप्रदाएकादशी बहुत खुश हुई।

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Posted By: Shailendra Kumar