HamburgerMenuButton

कोरोना संक्रमितों के शरीर में Antibodies इतने महीनों तक रह सकती है सक्रिय, अध्‍ययन में खुलासा

Updated: | Sat, 24 Oct 2020 06:41 PM (IST)

कोरोना वायरस (कोविड-19) पीड़ितों में एंटीबॉडी को लेकर एक नया अध्ययन किया गया है। इसका दावा है कि कोरोना से लड़ने वाली एंटीबॉडी किसी मरीज में लक्षण उभरने के बाद शुरुआती तीन हफ्तों के दौरान काफी तेजी से विकसित होती है। यह शरीर में सात माह तक सक्रिय रह सकती है। एंटीबॉडी की उत्पत्ति शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) इस घातक वायरस को बेअसर करने के लिए करती है। यूरोपियन जर्नल ऑफ इम्युनोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, कोरोना की चपेट में आने वाले पीड़ितों के शरीर में छह माह बाद भी एंटीबॉडी पाई गई। यह निष्कर्ष 300 कोरोना पीड़ितों और इस बीमारी से उबर चुके 198 लोगों पर किए गए एक अध्ययन के आधार पर निकाला गया है। इन निष्कर्षों के आधार पर विज्ञानियों ने यह भी बताया कि महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में ज्यादा मात्रा में एंटीबॉडी की उत्पत्ति होती है। पुर्तगाल के प्रमुख संस्थान आइएमएम के मार्क वेल्डहोएन के नेतृत्व में विज्ञानियों ने अस्पतालों में भर्ती किए गए 300 से ज्यादा कोरोना रोगियों व स्वास्थ्यकर्मियों, ढाई हजार यूनिवर्सिटी कर्मचारियों के साथ ही संक्रमण से उबर चुके 198 लोगों के शरीर में एंटीबॉड के स्तरों का अध्ययन किया। इन प्रतिभागियों में से करीब 90 फीसद के शरीर में कोरोना की चपेट में आने के सात माह बाद भी एंटीबॉडी की मौजूदगी पाई गई। वेल्डहोएन ने कहा, "हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली कोविड-19 का कारण बनने वाले सार्स-कोवी-2 वायरस को नुकसानदेह मानती है और इसकी प्रतिक्रिया में एंटीबॉडी की उत्पत्ति करती है।"

Posted By: Navodit Saktawat
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.