कट्ठीवाड़ा। सरकारी सेहत महकमे का हाल क्या है, यह जानना हो तो आदिवासी बहुल जिले के घने जंगल में बसे कट्ठीवाड़ा आइए। सरकार यहां संसाधन तो मुहैया करा देती है, मगर सालों इनका उपयोग ही नहीं हो पाता। अफसरों की इच्छाशक्ति में कमी कहें या छलावा, लोग परेशानी झेलने को मजबूर ही बने रहते हैं। ऐसा ही उदाहरण है यहां एक साल पहले पहुंचाई गई डिजिटल एक्सरे मशीन। अब तक यह मशीन सिर्फ एक ट्रांसफार्मर के अभाव में शुरू नहीं हो पाई है। वह भी तब जब जिले के प्रभारी मंत्री राजवर्धनसिंह दत्तीगांव करीब चार माह पहले इसे जल्द प्रारंभ करने के निर्देश देकर गए थे। अब अफसर विधायक निधि से राशि जुटाकर मशीन प्रारंभ करने की राह तक रहे हैं।

शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आई नई डिजिटल एक्सरे मशीन पर्याप्त वाल्टेज के अभाव में अब तक उपयोग में नहीं आ पाई है। मशीन को चलाने के लिए प्रभारी मंत्री से लगाकर कलेक्टर तक अपने अधीनस्थ स्टाफ को निर्देशित भी कर चुके हैं। करीब चार माह पहले प्रभारी मंत्री दत्तीगांव यहां दौरे पर आए थे। तब स्थानीय लोगों ने यह बात उठाई थी। इस पर मंत्री ने अफसरों को जल्द से जल्द मशीन प्रारंभ करने के निर्देश दिए थे। हालांकि अधिकारियों ने मंत्री के निर्देश को भी तवज्जाो नहीं दी। मशीन आज तक प्रारंभ नहीं हो पाई है। इंस्टालेशन से लगाकर स्टाफ, भवन, केबलिंग और सारी तैयारियां होने के बाद भी मात्र आवश्यक वोल्टेज की कमी के चलते नई एक्सरे मशीन चल नहीं पा रही है। इसके लिए स्वास्थ्य केंद्र पर 100 केवी क्षमता का ट्रांसफार्मर लगाना आवश्यक है। विद्युत वितरण कंपनी के अनुसार लागत लगभग छह लाख रुपए है।

अफसर निधि स्वीकृत होने का कर रहे इंतजार

अफसरों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग के पास ट्रांसफार्मर के लिए कोई बजट नहीं है। अब विधायक निधि से राशि स्वीकृत होने का इंतजार किया जा रहा है। विद्युत वितरण कंपनी को छह लाख रुपये जमा कराने के बाद यह काम हो सकेगा। इस संबंध में क्षेत्रीय विधायक ने आश्वस्त किया है।

गुजरात जाने की मजबूरी, आखिर सरकार कर क्या रही

इस संबंध में क्षेत्र के युवा हितेश तोमर, धूलसिंह तोमर, सुशील तोमर ने बताया कि नई एक्सरे मशीन आने के एक वर्ष के बाद भी काम मे नहीं आ पाने जैसी स्थिति बताती है कि प्रशासन के लिए जनता की परेशानी क्या मायने रखती है। केवल मशीन लाकर रखने की मानसिकता के चलते पूर्व में भी एक एक्सरे मशीन बिना चलाए भंगार में डाली जा चुकी है। इस बीच दुर्घटना में घायल हुए लोगों को उपचार के लिए गुजरात में ले जाना पड़ रहा है। वहां आदिवासी बहुल अंचल के गरीब लोगों को महंगा इलाज मजबूरी में कराना पड़ रहा है। आखिर यहां सरकार कर क्या रही है। अफसर मंत्री के निर्देशों का भी पालन नहीं कर रहे। इससे साफ है कि अफसरशाही जनप्रतिनिधियों पर भी हावी है।

यह भी जानिये

50 घायल हर माह औसतप सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए आते हैं

30 हजार ग्रामीण कस्बे व आसपास के क्षेत्रों के उपचार के लिए इस केंद्र पर निर्भर

30 से 50 किमी दूरी तक यहां एक्सरे मशीर की सुविधा न मिलने पर जाने की मजबूरी

इनका कहना

कलेक्टर ने जल्द से जल्द अस्पताल के लिए ट्रांसफार्मर स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। राशि जारी होते ही ट्रांसफार्मर लगा दिया जाएगा।

केएस तड़वाल, कार्यपालन यंत्री, विद्युत वितरण कंपनी

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Posted By: Nai Dunia News Network

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