2004-05 में गुजरात में हुई थी मौत, अब तक नहीं मिला है मुआवजा

आलीराजपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

सिलिकोसिस बीमारी से जिन श्रमिकों की मौत हुई है, उनके आश्रितों को मुआवजा राशि दी जानी है। गुजरात सरकार की तरफ से इस संबंध में एक पत्र प्रशासन को भेजा गया है। इसमें मुआवजा राशि सहित मृतक श्रमिकों की संख्या दर्ज है। मुआवजा देने से पहले प्रशासन अब जनपदवार यह जांच करा रहा है कि सिलिकोसिस बीमारी से ही मृत्यु हुई है या अन्य कोई कारण है। साक्ष्य मिलने पर ही आश्रितों को मुआवजा राशि दी जाएगी।

आलीराजपुर जनपद में करीब 45 लोगों के नाम है, जिनके आश्रितों को मुआवजा राशि मिलना है। करीब तीन लाख रुपए प्रति व्यक्ति राशि दी जाएगी। इसके लिए फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर आश्रितों से यह जानकारी जुटाई जा रही है कि संबंधित व्यक्ति की मौत सिलिकोसिस बीमारी से ही हुई है या अन्य कोई कारण था। इसके लिए आश्रितों से अफसरों के द्वारा प्रमाण-पत्र भी मांगा जा रहा है। बताया जा रहा है कि शिविर लगाकर आश्रितों को इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रमाण-पत्र वितरित कि ए गए थे, जिसमें स्पष्ट था कि संबंधित की मौत सिलिकोसिस बीमारी से ही हुई है।

सूत्रों के मुताबिक अधिकांश श्रमिकों की मौत साल 2004 व 2005 में हो चुकी है, मगर अब तक मुआवजा नहीं मिला है। जिले से रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में लोग गुजरात की ओर पलायन करते हैं। गुजरात में पत्थरों से संबंधित कार्य के दौरान यहां के श्रमिकों को सिलिकोसिस बीमारी वहां हुई और बाद में यहां मृत्यु हो गई।

गुजरात सरकार के पत्र के बाद बनाई टीम

दरअसल, सिलिकोसिस बीमारी से मृतक श्रमिकों के संबंध में गुजरात सरकार द्वारा जिले के 120 मृतकों के आश्रितों के लिए मुआवजा राशि 3.60 करोड़ आवंटित की गई थी, जिसमें से 24 मृतकों की छानबीन के बाद सिलिकोसिस बीमारी से मृत्यु के पुष्टिकारक दस्तावेज होने से मुआवजा राशि 72 लाख अंतरित की गई है तथा 16 श्रमिकों की सूची में त्रुटिपूर्ण जानकारी पाई गई है। शेष 80 मृतक जिनके मुआवजे का भुगतान लंबित है के संबंध में सिलिकोसिस बीमारी से मृत्यु होने के दस्तावेजी साक्ष्य, उनके परिवारजनों से पूछताछ,जिनको मुआवजा प्राप्त हो चुका है उनसे पूछताछ व अन्य साक्ष्य के लिए जनपद स्तरीय जांच दल गठित कि या गया है।

सिलिकोसिस बीमारी से मृतक श्रमिकों के आश्रितों को मुआवजा मिलना है। जिन आश्रितों को मुआवजा नहीं मिला है, इस संबंध में जनपदवार जांच दल बनाए गए है। आश्रितों से बातचीत कर यह पुष्टि की जा रही है कि मौत सिलिकोसिस बीमारी से ही हुई था या अन्य कोई कारण इसके पीछे रहा है।

- शशांक दुबे, नायब तहसीलदार आलीराजपुर