- आम उपभोक्ताओं की जेब को भी लगा बड़ा झटका

80 हजार कनेक्शन जिले में उज्ज्वला योजना के तहत दिए गए

20 फीसदी लोग ही दोबारा टंकि यों को भरा रहे

80 प्रतिशत लोगों ने दोबारा गैस टंकी को नहीं भरवाया

145 रुपए प्रति गैस टंकी दाम में कि या गया इजाफा

915 रुपए प्रति सिलेंडर दाम हुआ

आलीराजपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

घरेलू गैस के दामों में एकाएक भारी बढ़ोतरी हो जाने से लोगों के कि चन का बजट तो बिगड़ा ही है, वहीं शासन की महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना पर भी इसका असर पड़ना तय है। दरअसल इस योजना के तहत लाभ प्राप्त 20 फीसदी उपभोक्ता ही रिफलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। दाम बढ़ने के बाद इसमें कमी आना स्वाभाविक है।

घरेलू गैस टंकी के दाम में 145 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले गैस टंकी 770 रुपए में मिल रही थी। अब इसके लिए 915 रुपए प्रति सिलेंडर चुकाने पड़ रहे हैं। इसमें 317 रुपए सबसिडी दिए जाने की बात गैस एजेंसियां कह रही हैं। सबसिडी काटने के बाद अब घरेलू गैस सिलेंडर का रेट 598 रुपए हो जाएगा। जाहिर है इसका असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।

योजना पर असर पड़ेगा

कें द्र सरकार द्वारा लोगों को धुएं से राहत दिलाने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए उज्ज्वला योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत जिले में 80 हजार कनेक्शन दिए गए। एजेंसियों के अनुसार इनमें से 80 फीसद उपभोक्ताओं ने दोबारा अपने कनेक्शन से टंकि यों को रिफिल नहीं करवाया। सिर्फ 20 फीसदी उपभोक्ता ही टंकी वापस भरवा रहे थे। दाम बढ़ने के बाद इस पर असर पड़ेगा। यह आंकड़ा और नीचे आ सकता है।

कै से होगी शासन की मंशा पूरी

लगातार घरेलू गैस के दामों में कि ए जा रहे इजाफे से आम आदमी के घर का बजट बिगड़ रहा है। दूसरी ओर शासन की योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। जाहिर है ऐसी स्थिति में शासन की मंशा पूरी नहीं हो पाएगी। एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि जो लोग योजना के तहत गैस कनेक्शन ले रहे हैं, उनमें से अधिकांश इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं। या तो उन्होंने गैस टंकी को बेच दिया है या फिर वे इसका उपयोग नहीं करना चाह रहे।

यही हालात मध्यान्ह भोजन के लिए दिए गए गैस कनेक्शन के भी

कें द्र सरकार द्वारा उज्ज्वला योजना की शुरुआत तामझाम से की गई थी, कु छ इसी तरह स्कू लों में बनाए जाने वाले मध्यान्ह भोजन के नाम से भी गैस कनेक्शन दिए गए थे कि ंतु अधिकांश गैस कनेक्शन या तो शिक्षकों के घरों में उपयोग में आ रहे हैं या स्कलों में टंकि यां उपयोगविहीन पड़ी हैं। स्कू लों में मध्याह्म भोजन के लिए ईंधन के रूप में लकड़ियों का उपयोग हो रहा है। ऐसा नहीं है कि यह स्थिति अफसरों के संज्ञान में नहीं है। समय-समय पर निरीक्षण में यह बात सामने आती रही है। हालांकि जानकर भी इस ओर आंख मूंदे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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