आलीराजपुर से देवेंद्र मीणा। आदिवासी अंचल से पलायन कर गुजरात के बड़े शहरों में मजदूरी के दौरान सिलिकोसिस बीमारी की चपेट में आए लोगों के लिए आलीराजपुर के शंकर तड़वाल मसीहा बन चुके हैं। शंकर ने उन्हें परेशान होते देखा तो उनके लिए न्याय की लड़ाई शुरू कर दी। पिड़ि‍तों को राहत दिलाने वे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व सुप्रीम कोर्ट तक चले गए। इसके बाद इस गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को मुआवजा मिलने की राह आसान हुई। सामाजिक क्षेत्र में इस उल्लेखनीय कार्य के चलते उन्हें साल 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के हाथों सम्मान भी मिला।

शंकर का न्याय के लिए यह संघर्ष 2005 से शुरू हुआ और अनवरत जारी है। शंकर के मुताबिक आलीराजपुर जिले के करीब 45 गांवों में सिलिकोसिस से पीड़ित लोग हैं। ये लोग मजदूरी करने गुजरात जाते हैं और वहां असुरक्षित उद्योगों में काम करने से इसके शिकार हो जाते हैं। बीमारी के बाद इनकी कोई सुध नहीं लेता। यही नहीं इस बात को नकारने की भी कोशिश होती है कि असुरक्षित ढंग से काम करने से वे इस रोग की चपेट में आए हैं। वर्ष 2007 में शंकर ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को इस बारे में विस्तृत ज्ञापन भेजा।

आयोग ने वर्ष 2009 में गुजरात सरकार को 238 लोगों को मुआवजा देने के लिए नोटिस भेजा। चार बार नोटिस भेजने के बाद भी गुजरात सरकार ने इसका पालन नहीं किया। गुजरात सरकार का कहना था कि प्रभावित मजदूर बाहरी राज्य यानी मप्र के हैं। इसके बाद शंकर ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली और उद्योगों की अनदेखी से होने वाली यह बीमारी राष्ट्रीय मुद्दा बन गई। रोजगार एवं श्रम मंत्रालय ने पूरे देश से इस संबंध में जानकारी मंगवाना शुरू कर दी। इस पहल को देखकर अन्य राज्यों से भी मुआवजे के लिए आवेदन आयोग में आना शुरू हो गए।

शंकर बताते हैं कि कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से वर्ष 2016 में 238 और जून 2018 में 381 लोगों का मुआवजा स्वीकृत हुआ। मुआवजा पाने वालों में मप्र के धार, झाबुआ, आलीराजपुर और गुजरात के गोधरा, आणंद जिले के मरीज शामिल हैं। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। आलीराजपुर में 120 लोगों में से 24 लोगों को मुआवजा दिया गया। प्रशासन ने 80 लोगों का मुआवजा रोक दिया है और आयोग से इस संबंध में सबूत मांग लिए। शंकर व अन्य पीड़ितों के आवेदन के बाद प्रशासन पुन: जांच कर रहा है।

गुजरात में फैक्ट्री तक बंद कराई

शंकर ने बताया कि सिलिकोसिस से लोगों की मौत की कई घटनाएं सामने आने के बाद गुजरात में करीब 10 पत्थर पाउडर बनाने की फैक्ट्रियों को बंद किया गया है। गुजरात में कांच के काम के संबंध में फैक्ट्री मालिकों को डस्ट रोकने की मशीन लगाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे मजदूरों को परेशानी नहीं उठाना पड़े। इतने लोगों की मदद करने वाले शंकर आज भी खेती से जुड़े हैं। वे कहते हैं कि पहाड़ी इलाके में कुछ जमीन है। वहां खेती से आजीविका चलती है। पत्नी आंगनबाड़ी में है। वहां से भी थोड़ी मदद घर चलाने में हो जाती है।

सिलिकोसिस से मैं और परिवार के पांच अन्य लोग पीड़ित हैं। तीन लोगों को तीन-तीन लाख रुपए मुआवजा मिल चुका है। शेष को भी जल्द राशि मिलने की बात शंकर भाई ने कही है। उन्होंने ही हमारी लड़ाई लड़ी और मुआवजा दिलवाया। - चंदरसिंह पटेल, निवासी, ग्राम कुशलवाय, आलीराजपुर (मप्र)