किसी को घर छोड़कर नहीं जाना पड़ रहा परदेस, युवतियों को भी मिला मौका

मनोज भदौरिया, आलीराजपुर। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल आलीराजपुर जिले में हीरा तराशने की एक दर्जन नई इकाइयां रोजगार और कौशल के सम्मान की नई कहानी लिख रही हैं। कोरोना महामारी से मिले सबक के कारण अब हीरा तराशने का कुछ काम गुजरात के सूरत से यहां आ रहा है। कोरोना संक्रमण के पहले दौर में हजारों प्रवासी श्रमिकों को भूखे-प्यासे सैकड़ों किमी पैदल ही चलकर घर लौटना पड़ा था। इसके बाद हीरा तराशने वाले स्थानीय कारीगर सूरत के हीरा कारखानों में जाने के बजाय गृह क्षेत्र में ही काम को प्राथमिकता देने लगे। इस क्षेत्र के हीरा कारीगर दशकों तक सूरत में अपनी सेवाएं देते रहे हैं इसलिए वहां कंपनियों ने यहीं अपनी इकाइयां स्थापित कर तस्वीर बदलने की शुरुआत कर दी।

एक दर्जन इकाइयों में फिलहाल 500 स्थानीय लोगों को काम मिला हुआ है। इस कवायद के बेहतर परिणाम मिलते देख अब कंपनियों ने और नई इकाइयां शुरू करने की ओर कदम बढ़ाया है। खास बात यह है कि इकाइयां कारीगरों के गृह क्षेत्र में ही खोली गई हैं। इससे घर-गांव में ही पसंद का रोजगार मिल रहा है। एक सार्थक पहलू यह भी है कि अब अब युवतियां हीरा तराशने का काम सीखकर रोजगार पाने लगी हैं। बदलाव की इस पहल से 500 परिवारों में खुशियां तो आई ही हैं, सुकून भी बढ़ा है। काम करने वाले अधिकांश लोग मानते हैं कि अब परदेस नहीं जाना पड़ता इसलिए परिवार भी खुश है। बच्चों को शिक्षा पर भी पहले से अधिक ध्यान दे पा रहे हैं। उल्लेखनीय हैं कि गुजरात से सटे इस जिले की 7.29 लाख आबादी में 97 प्रतिशत आदिवासी हैं और 60 प्रतिशत काम के लिए अन्य राज्यों में जाते रहे हैं।

घर पर रहकर काम मिलने की खुशी ही अलग

कारीगर अंकुश रावत व ओगेश मंडलोई बताते हैं कि घर पर रहकर काम मिलने की खुशी ही अलग है। कोरोना काल से पहले क्षेत्र में प्रयोग के तौर पर एक-दो इकाइयां काम कर रही थीं लेकिन अधिकांश लोगों को सूरत ही जाना पड़ता था। कोरोना के बाद मांग को देखते हुए अब कई इकाइयां खुल गई हैं।

अब परिवार के साथ समय बिता पाते हैं। क्षेत्र के अन्य युवक भी यह काम सीख पा रहे हैं। उन्हें रोजगार भी मिल सकेगा। एक कुशल कारीगर दिन में 80 से 100 हीरे तराश देता है। महीने में उसकी 15 से 20 हजार रुपये तक कमाई हो जाती है। सूरत के व्यापारी हरीशभाई ने बताया कि यहां पर कुशल कारीगर हैं इसलिए उन्हें प्राथमिकता दी जाती है।

इस तरह किया जा रहा कारोबार

सूरत से मांग के आधार पर हीरे यहां तराशने के लिए भेजे जाते हैं। हर इकाई में कारोबारियों ने प्रबंधक नियुक्त कर रखे हैं। वे निगरानी का काम करते हैं। तराशे गए हीरे सूरत भेज दिए जाते हैं। कारोबारी भी समय-समय पर यहां आते हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close