मनोज भदौरिया, आलीराजपुर। मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले के आदिवासी युवक अब मतांतरण के खिलाफ आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। हिंदू युवा जनजाति संगठन के बैनर तले वे गांव-टोलों में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। इस धार्मिक आयोजन के दौरान ग्रामीणों को मतांतरण न करने की सीख दी जाएगी। अभियान के तहत जबरन या प्रलोभन देकर मतांतरण कराने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।

संगठन के सदस्यों का कहना है कि आदिवासी अंचल में कई जगह जबरन या प्रलोभन देकर मतांतरण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, इसलिए मतांतरण रोको आंदोलन शुरू किया जा रहा है। हाल ही में हुई जिला स्तरीय बैठक में इसे लेकर निर्णय लिया गया है। इसके अनुसार जहां से भी मतांतरण संबंधी सूचना मिलेगी, वहां संगठन के युवक जाकर उचित कानूनी कदम उठाएंगे। धार्मिक आयोजन के जरिये जन जागरण किया जाएगा। छह माह के भीतर जिले के हर गांव-फलिये (टोले) में हनुमान चालीसा का पाठ करने की योजना है।

बता दें, आलीराजपुर जिले की जनसंख्या करीब 7.29 लाख है। कुल 552 गांव-फलियों में करीब 97 प्रतिशत जनजातीय समुदाय के लोग हैं। क्षेत्र में मतांतरण के मामले अकसर सामने आते रहते हैं। पड़ोसी झाबुआ जिले में इस वर्ष तीन शिकायतें आई हैं। इनमें चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

अवैध रूप से बनाए गए धर्मस्थल हटाने की मांग

संगठन के जिला मीडिया प्रभारी हेमंत सिंह तोमर ने बताया कि जिले में जबरन या प्रलोभन देकर मतांतरण कराने वाले लोगों ने अवैध रूप से कई धर्मस्थल भी बना लिए हैं। ऐसे धर्मस्थल मतांतरण के केंद्र बनते जा रहे हैं। इन्हें हटाने की मांग संगठन लगातार करता रहा है। आवश्यकता पड़ी तो इसके लिए कोर्ट की शरण ली जाएगी। हेमंत सिंह तोमर के अनुसार देखा गया है कि अधिकांश मामलों में मतांतरण की शिकायतें पुलिस तक नहीं पहुंच पाती हैं। आंदोलन के तहत अब कानूनी शिकंजा भी कसा जाएगा, ताकि मतांतरण पर प्रभावी रोक लग सके।

जन जागरण के लिए यह भी करेगा संगठन

नवरात्र में विकासखंड व मंडल स्तर पर चुनरी यात्रा निकाली जाएगी। इसमें अधिक से अधिक आदिवासी समाजजन को जोड़ा जाएगा।

15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाएगा।

अब तक उठी ऐसी आवाज

-आदिवासियों की सामाजिक पंचायतों में मतांतरण करने वालों के बहिष्कार के प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं।

-हिंदू संगठन 'डीलिस्टिंग" को लेकर यहां बड़ा आंदोलन कर चुके हैं। इसमें मांग की गई थी कि मतांतरण करने वाले लोेगों को बतौर आदिवासी मिलने वाली सरकारी सुविधाएं न दी जाएं। इन्हें आरक्षण के लाभ सहित अन्य सभी लाभों से वंचित किया जाए।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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