जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सिवनी जिले की नगर परिषद बरघाट के प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को अपात्र मानकर प्रदत्त राशि की वसूली के आदेश पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने इस अंतरिम आदेश के साथ ही राज्य शासन, नगरीय प्रशासन विभाग, केंद्र सरकार, अवास व शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया।

याचिकाकर्ता राम भरोस ठाकरे सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता आशीष त्रिवेदी, असीम त्रिवेदी, आशीष कुमार तिवारी व अपूर्व त्रिवेदी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना प्रारंभ की गई थी। इसके अंतर्गत नगर परिषद बरघाट को भी सम्मिलित किया गया। बहुस्तरीय व बहुकोणीय सर्वे, स्थल जांच, जियो टैगिंग व आधार लिंकअप, आपत्ति आमंत्रण के बाद याचिकाकर्ताओं को योजना के लिए पात्र हितग्राही माना गया।

इसके बावजजूद नगर परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष व एक अन्य के बीच राजनीतिक वैमनस्य व वर्चस्व की लड़ाई के कारण अध्यक्ष के विरुद्ध कलेक्टर के समक्ष शिकायत कर दी गई। जिसमें आरोप लगाया गया कि अपात्र व्यक्तियों को लाभ दिया गया है। इसके आधार पर अनुविभागीय अधिकारी ने प्राथमिक जांच रिपोर्ट पेश की। उसे गंभीरता से लेकर सिवनी कलेक्टर ने याचिकाकर्ताओं को योजना के लिए अपात्र मानते हुए प्रदत्त राशि वसूली का आदेश जारी कर दिया। इससे पूर्व याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर तक नहीं दिया गया। इसीलिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। updating...

Posted By: Ravindra Suhane

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