Special on the Date of Birth: मनोज भदौरिया, आलीराजपुर। अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जन्मस्थली आलीराजपुर जिले के चंद्रशेखर आजाद नगर (पूर्व में भाबरा) को वादों की बेड़ियों से आजादी का इंतजार है। इतने सालों में राज्य सरकार यहां आजाद के बारे में पूरी जानकारी दे सके, ऐसा एक व्यवस्थित वाचनालय तक तैयार नहीं करवा पाई है। वादे और दावे कई किए गए, योजनाएं बनीं मगर धरातल पर नहीं उतर पाईं। भारत माता के इस सपूत को उसकी जन्मस्थली में नमन करने के लिए यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं, मगर पर्यटकों के लिए सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है।

ये वादे पूरे नहीं

खेल मैदान बना सपना : आजाद जब छोटे थे तो गढ़ी क्षेत्र में तीरंदाजी करते थे। यहां खेल मैदान बनाए जाने की बातें तो बहुत हुईं मगर कुछ हुआ नहीं। गढ़ी भी देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हो गई। अगर खेल मैदान बना दिया जाए तो आजाद के बालपन का साक्षी रहा यह क्षेत्र भी नई पहचान प्राप्त कर सकेगा।

बदहाल सड़कें: चंद्रशेखर आजाद नगर में पहुचने वाली सड़कें भी कई वर्षों से अपनी बदहाली की कहानी सुना रही हैं। जिला मुख्यालय से आजादनगर को जोड़ने वाले मार्ग की स्थिति भी खराब हो चुकी है। इसे नेशनल हाईवे के अंतर्गत लिया गया है। भविष्य में यहां टू-लेन मार्ग की योजना है।

अतिक्रमण की मार : आजाद मैदान के आसपास ही अतिक्रमण की भरमार है। आसपास सब्जीवाले बैठते हैं। इससे आवागमन बाधित होता है।

पीएम नरेंद्र मोदी भी आए थे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन वर्ष पूर्व विश्व आदिवासी दिवस के दिन यहां आकर आजाद को नमन किया था। यह पहला मौका था, जब कोई प्रधानमंत्री आजाद की जन्मस्थली आया। एक दशक पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी यहां आए थे। तब उन्होंने घोषणा की थी कि अब से वे या कोई मंत्री आजाद की जन्मतिथि और शहादत दिवस पर यहां जरूर आएगा। बीते सालों में मंत्रियों की मौजूदगी यहां रही है।

अब बनाई आजाद पार्क विकास की योजना

दाहोद रोड पर स्थित पहाड़ी आजाद के स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष के काल की साक्षी रही है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने यहां पर भी समय बिताया। नगर परिषद ने यहां आजाद स्मृति उपवन के विकास की योजना बनाई है। पांच हेक्टेयर भूमि पर उद्यान विकास में करीब तीन करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। योजना इस तरह बनाई जा रही है कि लोग यहां आएं, ठहरें और आजाद के बलिदान को जानें। उद्यान के मध्य में आजाद की 51 फीट ऊंची प्रतिमा लगाई जाएगी। आजाद से जुड़ा साहित्य और चित्र यहां रखे जाएंगे। सर्वसुविधायुक्त कक्षों का निर्माण भी प्रस्तावित है। पार्क में मनोरंजन व खानपान के साधन भी जुटाए जाएंगे। नगर परिषद इसकी डीपीआर तैयार करवा रही है।

गौरतलब है कि जिस कुटिया में चंद्रशेखर ने जन्म लिया था, उसका मूल स्वरूप अब बचा नहीं है। कुटिया को नया रूप दिया है। इसके पास ही राज्य सरकार ने वर्ष 2012 में आजाद स्मृति मंदिर का निर्माण करवाया। भाबरा का नाम बदल चंद्रशेखर आजादनगर किया गया। स्मृति मंदिर में आजाद की सात फीट ऊंचाई की अष्टधातु की प्रतिमा है। आजाद मैदान में अमर शहीद की अष्टधातु की 14 फीट ऊंची प्रतिमा है।

इनका कहना है

शासन को चंद्रशेखर आजाद नगर के विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही इन पर काम शुरू होगा और आजाद नगर की सुंदरता बढ़ेगी।

- सुरभि गुप्ता, कलेक्टर, आलीराजपुर

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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