अनूपपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिला मुख्यालय से दो किमी उत्तर-पश्चिम में सोन और चंदास नदी के संगम पर स्थित बाबा मढ़ी अत्यंत पवित्र, रहस्यमयी, अलौकिक स्थल ग्राम पंचायत परसवारा अंतर्गत करहीबाह गांव के पास है जो श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है यहां प्राचीन शिलालेख हैं और मान्यता है कि पांडवों ने इसी स्थान पर अनूपपुर नगर के पांडव कालीन सामतपुर मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों को तराशा था। यहां बिजली और सड़क जैसी सुविधाएं ना होने से श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ रही है जबकि निरंतर यहां धार्मिक कार्यक्रम होते हैं और यहां नवरात्र, मकर संक्रांति जैसे पर्व पर दर्शन और पूजा करने पहुंचते हैं । लेकिन जिला मुख्यालय और जिले की बड़ी आबादी को इस स्थल की सिद्धता होने के बावजूद जानकारी तक नहीं है।इसका बड़ा कारण यहां तक पहुंच मार्ग का ना होना है।

सोन -चंदास संगम पर स्थित बाबा मढ़ी तक पहुंच मार्ग नहीं है। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट के सामने से पगडंडी मार्ग से चंदास नदी को पार करके या मानपुर स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय के बगल से सोन नदी को पार करके यहां श्रद्धालुगण आते हैं। बीआरसी भवन के बगल से होकर एक मार्ग करहीबाह ( परसवार) होकर है। लेकिन यहां तक पहुंचने के लिये लगभग दो किमी पैदल चलना होता है।बाबामढी में हजारों वर्ष पुराने मन्दिर के अवशेष आज भी उपलब्ध हैं।अधिकांश प्रतिमाएं, मन्दिर के अवशेष खंडित हैं तथा हजारों वर्षों से बिना देखभाल , ऐसे ही बिखरे हुए हैं। यद्यपि स्थानीय लोगों ने इसे सहेजने का प्रयास करते हुए ग्रामीण परिवेश में प्रचलित देव स्थान का स्वरुप देने की कोशिश की है। नक्काशीदार पत्थरों पर चूना, डिस्टेंपर पोत देने से मूल स्वरुप पहले से कुछ बदला हुआ सा है।यहां पहुंचने पर इस स्थल को नजदीक से देख कर इसके आयु काल का आंकलन नहीं किया जा सकता स्थानीय लोगों के अनुसार इसका संबध पाण्डवों से रहा है।

यहां बरगद,पीपल,नीम,पलाश, आम सहित बहुत से विशालकाय वृक्षों,झाड़ियों, लताओं का समूह प्राकृतिक सुन्दरता को निखारता दिखता है।सोन -चंदास में पानी का बहाव हमेशा बना रहने से यह स्थल अत्यंत रमणीक दिखता है।वर्तमान में इस स्थान पर प्राचीन धरोहरों के साथ माता कालिका का मन्दिर भी है। जहां नवरात्र में जवारा बोने,अखंड ज्योति जलाने के साथ नियमित भक्त मंडली द्वारा भजन, कीर्तन और समय- समय पर भंडारे का आयोजन होता है।एक शिव प्रतिमा, बजरंगबली एवं दुर्गा जी की प्रतिमा भी यहां है।जिला प्रशासन से इस सिद्ध, प्राचीन स्थल की नैसर्गिकता, सुन्दरता को बचाए रख कर चंदास नदी में एक छोटा स्टाप डैम, रपटा बना कर कच्चा मुरुम निर्मित पहुंच मार्ग विकसित करने तथा पुरातत्व विभाग से इसे संरक्षित करने की मांग स्थानीय लोगों ने की है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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