अनूपपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शरद पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार रात लोगों ने जगराता कर माता लक्ष्‌मी की पूजा की और खीर बनाकर चांदनी रात में रखा ।जिले के पवित्र नगरी मां नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक में भी शरद पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे पवित्र कुंड में स्नान और दान किया। रात को भी श्रद्धालु यहां रुके रहे और शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया। बुधवार को अमरकंटक नर्मदा मंदिर में दर्शन के लिए दिनभर श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ रही कुंड में स्नान के बाद मंदिर में दर्शन हेतु लंबी कतार रही। नर्मदा में शरद पूर्णिमा पर स्नान,दान और पूजन का महत्व बताया गया है इसलिए यहां देश के विभिन्ना प्रांतों से श्रद्धालु एकत्र हुए।

अमरकंटक में शरद पूर्णिमा मनाने का महत्व-अमरकंटक अमर पर्वत के रूप में भी जाना जाता है। माता नर्मदा को अमृता भी कहा जाता है। शरद पूर्णिमा में जो भी अमरकंटक से यात्रा करते हैं नर्मदा में स्नान, दान, पूजा करते हैं वह महालक्ष्‌मी स्वरूप के अनुरूप आशीर्वाद के भागीदार कहलाते हैं।ऐसा मानना है कि पूरे विश्व में शरद पूर्णिमा बनाने का महत्व होता है तो उससे कहीं 100 गुना ज्यादा महत्व पूजा - पाठ शरद पूर्णिमा के दिन अमरकंटक में नर्मदा नदी प्रांगण स्थल पर माना जाता है।

51 शक्ति पीठ में एक स्थान अमरकंटक - अमरकंटक 51 शक्तिपीठों में एक स्थान अमरकंटक के रूप में भी जाना जाता है।अमरकंटक नर्मदा प्रांगण तपस्थली व तीर्थ स्थानों के नाम पर विद्यमान हैं। नर्मदा मंदिर के पुजारी वंदे महराज बताते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात को इसलिए विशेष माना जाता है कि नारायण भगवान कृष्ण के अवतार में धरती पर आए थे।

चंद्रमा में 16 कलाओं के साथ होती है अमृत वर्षा - शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा में सुंदर 16 कलाएं विद्वान होने के साथ अमृत की वर्षा होती है। पूरे दिन व्रत रहकर उस अमृत को पाने के लिए रात्रि जागरण भी किया जाता है अमरकंटक के पुजारी वंदे महाराज ने बताया कि आज के दिन महालक्ष्‌मी अपना सारा वैभव लेकर पृथ्वी लोक पर पहुंचती है और पृथ्वी लोक पर अपने भक्तों को यश वैभव प्रदान करती हैं इसलिए आज के दिन महालक्ष्‌मी की भी पूजा की जाती है।

खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने का है प्रथा - शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है सुबह 4 बजे उस खीर का पारण किया जाता है ऐसा करने से लोगों की आयु में वृद्धि दुख बीमारी दूर होती है। शरद पूर्णिमा के अवसर पर पूनम के चांद अपने पूरे आकार पर रही जिससे रात को चांदनी हर कोने पर छिटकी रही इस अवसर पर लोगों ने माता लक्ष्‌मी की पूजा आराधना कर खीर बनाकर चांदनी में रखी। इस अवसर पर जगह-जगह विभिन्ना धार्मिक आयोजन भी हुए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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