अनूपपुर।

जिले में स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर लोग आगे नहीं आ पा रहे हैं जिससे जरूरतमंदों को ब्लड नहीं मिल पा रहा है।जिला अस्पताल में मदर ब्लड बैंक स्थापित किया गया है जिसकी क्षमता 300 यूनिट की है लेकिन यहां अक्सर ब्लड की कमी बनी रहती है। फिलहाल यहां मात्र सात यूनिट ब्लड उपलब्ध है। जिससे गंभीर रूप से घायलों गर्भवती महिलाओं, सिकल सेल के मरीजों को खून की जरूरत के वक्त भटकना पड़ता है। ब्लड बैंक में ब्लड बेहद कम मात्रा में अलग-अलग ग्रुप के मौजूद रहते हैं जिससे कई बार मरीजों की जान आफत में पड़ जाती है। स्वास्थ्य विभाग में शिविर के आयोजन में उदासीन बना हुआ है।

हर साल 1 अक्टूबर को स्वैच्छिक रक्तदान दिवस मनाया जाता है। पहले इस मौके पर जगह-जगह रक्तदान शिविर के आयोजन होते थे जिससे काफी मात्रा में ब्लड डोनेड होने से अस्पताल में विभिन्ना ग्रुपों के ब्लड एकत्र हो जाते थे जिससे जरूरतमंद मरीजों को इलाज में मदद मिलती थी। अब रक्तदान शिविर कम हो रहे हैं और जागरूकता के बावजूद भी लोग इस पुनीत कार्य में आगे नहीं आ रहे हैं जिससे अक्सर अस्पताल के मदर ब्लड बैंक में ब्लड का संकट बना रहता है। 300 यूनिट क्षमता वाले अनूपपुर ब्लड बैंक में सात यूनिट ब्लड मौजूदा समय में उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। जबकि यहां 50 से अधिक यूनिट विभिन्न रूपों के मौजूद रहने चाहिए। इस वर्ष कोरोना की वजह से ब्लड बैंक में संकट बरकरार रहा है। स्वास्थ विभाग शिविर का आयोजन भी नहीं रख सका।

1 अक्टूबर को जिला अस्पताल सहित विकासखंड मुख्यालयों में विभाग एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से कोई रक्तदान शिविर का आयोजन नहीं रखा गया। लोगों में भ्रांतियां भी बनी हुई है जिससे कई इस सेवा से जुड़े कार्य में आगे नहीं आ पाते। कोरोना महामारी की वजह से विभाग जहां एक और शिविर का आयोजन कर नहीं पा रहा वहीं समाजसेवी संस्थाएं भी आगे नहीं आ पा रही हैं जिससे लोगों को बड़ी समस्या हो रही है और वह भटक रहे हैं।

जानकारी अनुसार इस चालू वर्ष में 9 माह में मात्र चार शिविर का आयोजन हुआ जिसमें से मात्र 88 यूनिट ब्लड का कलेक्शन हो सका। फरवरी माह में 2 शिविर में जहां 71 यूनिट और मार्च माह में दो शिविर से महज 17 यूनिट रक्त का जुटाव किया जा सका। कोरोना के आने से पहले भी ब्लड डोनेशन कैंप नहीं लगे अब भी वही हालात बने हुए हैं।हां यह जरूर है कि जिला अस्पताल के मदर ब्लड बैंक में लोग अपनी जान पहचान और स्वजनों को जरूरत पड़ने पर ब्लड डोनेड कर रहे हैं। लेकिन स्वैच्छिक रूप से लोग इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा नहीं ले रहे हैं। पिछले वर्ष भी शिविर कम लगे थे जानकारी अनुसार 19 शिविर का आयोजन हुआ था जिसमें से कुल 533 यूनिट रक्त का संग्रहण हुआ था।

जिससे लोगों को बड़ी मदद मिली थी। अनूपपुर की तरह कोतमा और पुष्पराजगढ़ सीएचसी में संचालित ब्लड बैंक की भी स्थिति ठीक नहीं है यहां भी रक्तदाता आगे नहीं आ रहे हैं। अधिक से अधिक रक्तदान शिविर लगाकर जरूरतमंदों को खून की जरूरत पूरी की जा सकती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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