अनूपपुर। शारीरिक विकलांगता को बाधा ना समझते हुए ऐसे निशक्त परिवार से मिले सहयोग और प्यार से जीवन के नए राह में आगे बढ़ रहे हैं कुछ सफल हो चुके हैं तो कुछ कदम बढ़ाते चले जा रहे हैं। इनके हौसले ऐसे लोगों के लिए एक उदाहरण हैं जो दिमागी रुप से खुद को कमजोर कर लिए हैं और खुद कुछ नहीं कर रहे हैं और दूसरों का सहारा बने हुए हैं।

संघर्षों ने साहब लाल को बनाया शिक्षकः दाएं पैर से दिव्यांग बचपन में मुश्किलों का सामना करते हुए पहले गांव में दो किलोमीटर दूर एक लाठी के सहारे प्राथमिक शिक्षा हासिल की फिर सात किलोमीटर दूर ग्राम खांटी चाकर आठवीं कक्षा उत्तीर्ण की। साहब लाल सिंह निवासी ग्राम पड़रिया विकासखंड पुष्पराजगढ़ यह कहानी है जो अपनी विकलांगता को अपने लक्ष्‌य के सामने कभी आगे नहीं आने दिया और निरंतर पढ़ाई करके आगे बढ़े तथा सरकारी स्कूल में शिक्षक बने। 13 वर्ष से साहब लाल सिंह माध्यमिक शिक्षक हैं। बड़े पिता फग्गू सिंह जो खुद निरक्षर थे उन्होंने साहब लाल को पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित किया। एक लाठी के सहारे साहब लाल ने पढ़ाई के प्रति अपना ध्यान अलग नहीं किया। कई किलोमीटर दूर नदी नाले पारकर पढ़ाई पूरी की। डाक्टर बनने की चाहत साहब लाल को थी लेकिन लेकिन वर्ग दो में चयन हो जाने पर बीएमएलटी की पढ़ाई छोड़ दी और आज वह शिक्षक हैं। पहले उनके पास स्कूल आने जाने के लिए कोई साधन नहीं था एक घंटा अतिरिक्त समय पैदल एक पैर के सहारे स्कूल पहुंचते थे और पढ़ाई के बाद फिर घर उसी तरह आया करते थे। पिता बुद्धसेन सिंह बेनीबारी स्कूल में शिक्षक के पद पर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। साहब लाल ने कहा गरीबी और संघर्ष को उन्होंने नजदीक से देखा लेकिन आगे बढ़ने की ललक ने उन्हें सफलता पहुंचाई।

साक्षी और सोनाक्षी बहन चित्रकला में हैं पारंगतः जैतहरी विकासखंड के ग्राम पंचायत पिपरिया अंतर्गत शिकटहा टोला के रामचरण पटेल के बेटे संजय की दोनों बेटियां साक्षी और सोनाक्षी जिनकी आयु 7 वर्ष हो चुकी है दोनों काफी होनहार है पढ़ाई में आगे है ही और चित्रकला रंगोली बनाने में भी बेहद माहिर हैं जो कि अपनी दादी से यह कला सीखी है। दादा राम चरण ने कहा की दोनों बच्चियां बचपन से हाथ- पैर से भी दिव्यांग हैं। परिवार ने इन्हें कभी महसूस नहीं होने दिया कि यह दिव्यांग है। एक स्ट्रेचर में बैठाकर दोनों को स्कूल आधा किलोमीटर ले जाया जाता है। परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय है फिर भी दोनों बच्चों के भरण पोषण में कोई कमी नहीं रखी जा रही है।साक्षी और सोनाक्षी ने अपनी प्रतिभा पिछले वर्ष से दिव्यांग कार्यक्रम में जिला मुख्यालय में प्रदर्शित की जो सभी ने सराहा था। पिता संजय पटेल जरूर आवास योजना का लाभ सूची में नाम आने के बाद ही ना मिलने से हताश हैं बताएंगे बच्चियों को वर्ष में केवल छह सौ रुपए ही मिलते हैं।

सोनू और सागर संगीत में है माहिर

जैतहरी जनपद के ग्राम कोटा टोला के समीप ग्राम पपरौड़ी के रहने वाले हैं सोनू और सागर राठौर। दोनों भाई संगीत में माहिर हैं पूरे गांव में इन्हें आमंत्रित किया जाता है जो संगीत की प्रस्तुति देते हैं। जिला मुख्यालय के दिव्यांग छात्रावास में पहले यह पढ़ाई कर रहे थे लेकिन बंद हो जाने से घर पर हैं। इनके अभिभावक रविंद्र और मायावती राठौर के दोनों संतान हैं जो दृष्टिबाधित हैं। लेकिन जज्बा ऐसा है कि यह दोनों भाई जो एक वर्ष के अंतराल में छोटे -बड़े हैं।पढ़ाई के साथ-साथ हर वाद्य यंत्र बजाने में कुशल है। सोनू जो वर्ष के हो चुके हैं ने बताया कि उन्हें ढोलक और नगरिया बजाने का शौक बचपन से था। माता-पिता अभाव के बीच में यह वाद्य यंत्र लाकर दिए थे। छात्रावास में शिक्षकोंने मार्गदर्शन दिया जिससे वह बजाने के साथ ही सुंदर गाने का भी लेते हैं और मां दुर्गे के ऊपर एक के खुद का बनाया हुआ गाना भी तैयार किया गया है। मां मायावती का कहना है कि ईश्वर ने दोनों बेटों को जैसा भी भेजा है वह इनके प्रति पूरी तरह से समर्पित होकर इनके जीवन को अपनी जिंदगी तक सब कुछ देने का प्रयास करेंगे।यदि इन्हें संगीत में एक अच्छा प्रशिक्षण और मौका मिल जाए तो इनका जीवन संभल जाए।वर्तमान में दोनों भाई करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल मां के साथ प्रतिदिन खूंटा टोला स्कूल पढ़ने जाते हैं इन्हें कोई ट्राई साइकिल भी विभाग के माध्यम से नहीं मिली है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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