अनूपपुर । मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल रविवार को सुबह 10:30 बजे अनूपपुर पहुंचे। वह यहां दो दिन रहेंगे। अमरकंटक हेलीपैड से वह सीधे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय पहुंचे। राज्यपाल मंगू भाई पटेल का आइजीएनटीयू हेलीपैड में मध्य प्रदेश शासन के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री बिसाहूलाल सिंह, शहडोल संसदीय क्षेत्र की सांसद हिमाद्री सिंह, कमिश्नर राजीव शर्मा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डीसी सागर, कलेक्टर सोनिया मीना, पुलिस अधीक्षक अखिल पटेल, आइजीएनटीयू के कुलाधिपति डा. मुकुल शाह, आइजीएनटीयू के कुलपति प्रकाश मणि त्रिपाठी ने गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया।

राज्यपाल के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में आगमन पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लगाई गई है। इस बीच अंदर जाने के लिए कई नेताओं ने नारेबाजी की और विवाद की स्थिति पैदा कर दी। जिला और पुलिस प्रशासन के अधिकारी वहां मौजूद रहे, लेकिन आक्रोशित नेताओं ने मुर्दाबाद के नारे भी लगा दिए। नेतागण वहां जाना चाह रहे थे, जहां राज्यपाल की बैठक होनी थी, जिसमें जाने से रोका गया। अनूपपुर जिले के भाजपा नेता अनिल गुप्ता एवं उनके सहयोगियों ने जमकर विवाद किया। वहीं पुलिस एवं जिला प्रशासन का अमला का कहना रहा कि अंदर नहीं जाने देंगे। प्रोटोकाल के तहत ही लोग अंदर जा पाएंगे।

राज्‍यपाल ने निश्‍शुल्‍क शिक्षण केंद्र खोलने की घोषणा की

इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के राज्यपाल ने कहा कि डा. आंबेडकर केंद्र के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को सिविल सेवा की तैयारी के लिए एक निश्‍शुल्‍क शिक्षण केंद्र अमरकंटक विश्वविद्यालय में स्थापित हुआ है। मैं इस केंद्र को खोलने की घोषणा करता हूं।

आदिवासी बच्चों में सिकल सेल की पहचान जरूरी, प्रशासनिक अधिकारी उठाएं जरूरी कदम

इंदिरा गांधी जनजाति विश्वविद्यालय के सभागार में राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने जनजाति समाज में सिकल सेल की बीमारी को गंभीर बताया और इसमें कमी लाने के लिए सरकारी अधिकारियों को गांवों में जाकर आदिवासी समाज के लोगों को इस बीमारी के बारे में जानकारी देने की बात कही। साथ ही बीमारी से बचने के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कहा। राज्‍यपाल ने कहा कि आदिवासी समाज में बच्चों की शादी के पहले यह देखना चाहिए कि लड़के और लड़की में सिकल सेल तो नहीं है। यदि एक को होगा तो चलेगा, लेकिन यदि दोनों को हुआ तो जो बच्चा होगा वह सिकलसेल से पीड़ित होगा। यानी शादी के समय सिकल सेल की जांच बहुत जरूरी है। आदिवासी समाज के लोगों को इस विषय में समझाना होगा। पोस्टर, बैनर के माध्यम से प्रचार करने से समाज के लोगों में जागरूकता नहीं आएगी, बल्कि जब अधिकारी गांव में जाकर उन्हें बताएंगे कि बीमारी कैसे होती है और कैसे बचा जा सकता है तब लोग सतर्क होंगे।

दवाइयों और जीवनशैली में बदलाव से ठीक हो सकता है क्षय रोग- राज्यपाल

प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि क्षय रोग और सिकलसेल को रोकने के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य एवं सार्थक प्रयास करने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर क्षय रोग से भारत को 2025 तक मुक्त बनाने की घोषणा की है। इस दिशा में सभी चिकित्सकों, शासकीय कर्मचारियों एवं जनप्रतिनिधियों को प्रयास करने की आवश्यकता है। क्षय रोग पूर्णत: ठीक हो सकता है, बशर्ते मरीज समय पर दवाइयां ले और जीवनशैली में सुधार कर शराब, धूम्रपान जैसे दूर्व्यसनों से दूर रहें। राजपाल ने कहा कि दवाइयों के साथ वाइन और धूम्रपान नहीं चलेगा। क्षय रोग से ठीक होना है तो मरीजों को वाइन और धूम्रपान छोड़ना ही होगा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल रविवार को इंदिरा गांधी जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक में आयोजित राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम एवं सिकल सेल एनीमिया की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल ने कहा कि सिकलसेल के कई मरीजों को उन्होंने देखे हैं, इस रोग के प्रति जागरूकता आवश्यक है, यह रोग जनजातीय समुदाय में ज्यादा देखे गए हैं। मध्यप्रदेश में आदिवासियों की जनसंख्या ज्यादा है, इसे दृष्टिगत रखते हुए जनजाति क्षेत्रों में सिकल सेल के प्रति जागरूकता आवश्यक है।

समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान ने बताया कि राज्य भवन में सिकल सेल की लगातार समीक्षा की जा रही है, क्षय रोग और सिकल सेल रोग के नियंत्रण हेतु राज्यपाल का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। प्रदेश में सिकल सेल के मरीजों का चिन्हांकन किया जा रहा है। साथ ही उनकी स्क्रीनिंग भी की जा रही है तथा बेहतर उपचार देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि टीवी रोग नियंत्रण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पहले छह रोग की जांच की सुविधा जिला स्तर पर ही थी अब इसे ब्लाक स्तर तक पहुंचा दिया गया है। मध्य प्रदेश में रक्तदान के क्षेत्र में अच्छा कार्य हुआ है इसकी सराहना हुई है। उन्होंने बताया कि सिकलसेल की टेस्टिंग की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

बैठक के दौरान कलेक्टर अनूपपुर सुश्री सोनिया मीणा ने बताया कि क्षय नियंत्रण के लिए अनूपपुर जिले में संसाधनों की कमी के बावजूद भी अच्छे प्रयास किए गए हैं। क्षय नियंत्रण कार्यक्रम में अनूपपुर जिला मध्य प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने बताया कि अनूपपुर जिले में 1 लाख 60 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की गई है, इसमें 13 हजार 68 मरीज एनिमिक पाए गए हैं, जिन्हें उपचार मुहैया कराया जा रहा है।

समीक्षा के दौरान डाक्टर रूबी ने बताया कि सिकल सेल के रोगियों के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया गया है। सभी जिला चिकित्सालय में स्क्रीनिंग की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर हिमोग्लोबिन पैथिक मिशन चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि खून की कमी, सांस लेने में तकलीफ होने पर शीघ्र जांच करानी चाहिए तथा रोगियों को जेनेटिक काउंसलिंग भी कराना चाहिए। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए डाक्टर वर्षा ने बताया कि मध्यप्रदेश में टीवी उपचार की सभी सुविधाएं नि:शुल्क है। मध्यप्रदेश में पिछले 4 महीने में 1 लाख 35 हजार टीव्ही मरीजों की टेस्टिंग की गई है। समीक्षा के दौरान क्षय रोग से पीड़ित मरीज रामपाल बघेल ने बताया कि मेरा इलाज अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है, जिससे मैं ठीक हो रहा हूं। समीक्षा के दौरान अनूपपुर जिले के नीरज सिंह राठौर ने बताया कि मेरी उम्र 13 साल की थी, तब मुझे पता चला कि सिकलसेल है, मुझे तत्कालीन कलेक्टर ने मुझे इस बीमारी के प्रति मोटिवेट किया। समीक्षा बैठक के दौरान प्रदेश के राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने सिकलसेल बीमारी एवं टीवी की बीमारी से पीड़ित मरीजों को पोषण किट्स का वितरण भी किया।

Posted By: tarunendra chauhan

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