आकाश सिंह भदौरिया। अशोकनगर

जिले में पिछले तीन साल में तेंदुओं का कुनबा बढ़ा है। वर्ष 2018 तक यहां सिर्फ एक-दो तेंदुआ ही थे, मगर इस बार वन विभाग द्वारा की गई गणना में तेंदुओं की संख्या 15 से 17 पहुंच गई है। क्योंकि विभाग को 17 अलग-अलग बीट (इलाकों) में इनके साक्ष्‌य मिले हैं। यह जिले के लिए अच्छी खबर है। यह सभी तेंदुआ ईसागढ़ और चंदेरी इलाके में मिले हैं। क्योंकि यहां तेंदुओं के लिए घना जंगल है। वन विभाग द्वारा अब इनके संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है। वन विभाग द्वारा जिले को कुल 62 बीटों में विभाजित किया गया है। वर्ष 2018 में इन सभी बीटों में विभाग के कर्मचारियों ने तेंदुओं की गणना की थी, तो यहां सिर्फ एक बीट में ही तेंदुआ के साक्ष्‌य मिले थे। इससे अनुमान लगाया गया था कि जिले में 1 या दो तेंदुआ ही हैं, मगर इसके बाद तेंदुओं की संख्या में इजाफा हुुआ है। शिवपुरी जिले से लगे ईसागढ़ और चंदेरी के जंगल में हाल ही के दिनों में कई बार तेंदुआ नजर आ चुका है। तेंदुओं के द्वारा मवेशी और ग्रामीणों पर हमला भी किया गया है। ईसागढ़ में एक खेत की बागड़ में एक तेंदुआ के फंसने पर वन विभाग ने रेस्क्यू करके उसे निकाला था। इसी के बाद वर्ष 2021 के दिसंबर माह में वन अमले ने जिले में तेंदुओं की गणना की। इसमें इस बार 17 अलग-अलग बीट में तेंदुओं के साक्ष्‌य मिले हैं। वन अधिकारियों का मानना है कि इस बार जिले में 15 से 17 तेंदुए बने हुए हैं।

ईसागढ़ और चंदेरी के जंगल में हैं तेंदुआ

जिले में सबसे अधिक जंगल ईसागढ़ और चंदेरी इलाके में है। ऐसे में वन विभाग की टीम द्वारा किए गए सर्वे में भी इनके साक्ष्‌य इन दोनों इलाकों के जंगल में ही मिले हैं। उल्लेखनीय है कि चंदेरी से ईसागढ़ के बीच जिले में जंगल है। चंदेरी के किले को तो तेंदुओं का विचरण क्षेत्र भी घोषित किया गया है। यह इनका मूवमेंट होने की आशंका रहती है।

जिले में दिसंबर माह में गणना कराई गई थी। इसमें इस बार 17 बीट में तेंदुआ होने के साक्ष्‌य मिले हैं, जबकि वर्ष 2018 में हुुई गणना में सिर्फ एक बीट में ही तेंदुआ के साक्ष्‌य थे।

- डा. अंकित पांडे, डीएफओ अशोकनगर

Posted By: Nai Dunia News Network

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