अशोकनगर (नवदुनिया प्रतिनिधि)। राजपुर क्षेत्र के पनया गांव के बच्चों की आवाज अधिकारियों तक पहुंच गई है। 20 साल से जिस उम्मीद के चलते स्कूल चल रहा था अब वहां जिला कलेक्टर की पहल पर स्कूल बनने की अड़चने लगभग खत्म होती दिखाई दे रही हैं। मंगलवार को कलेक्टर की पहल पर जिला वन अधिकारी ने वन विभाग के अधिकारियों को गांव भेजा। जहां पड़ताल के बाद अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि अब उनके बच्चों को झोपड़ी में नहीं पढ़ना पड़ेगा। वे अब स्कूल में ही पढ़ेंगे। उल्लेखनीय है कि पनया गांव में 20 साल पहले स्कूल के निर्माण में वन विभाग की जमीन होने के कारण ऐसा अड़ंगा लगा कि इतने सालों में बच्चों को स्कूल के लिए छत तक नसीब नहीं हो सकी। सालों से इस समस्या के लिए कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब समस्या का हल नहीं निकला तो नवदुनिया ने बच्चों की पुकार को जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए सेतु बनाते हुए प्रमुखता से खबर का प्रकाशन किया। नवदुनिया की यह पहल रंग लाती दिखाई दे रही हैं। जिले में सकारात्मक कार्यो के लिए अपनी अलग पहचान बना चुकीं जिला कलेक्टर आरउमा महेश्वरी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जिला वनाधिकारी से चर्चा की। जिला वनाधिकारी ने भी तत्परता दिखाते हुए मंगलवार को वन विभाग के अधिनस्थ अधिकारी और कर्मचारियों को पनया गांव भेजा। जहां पर स्कूल बिल्डिंग का अधिकारियों ने निरीक्षण किया। इसके बाद स्कूल भवन के लिए कितनी जगह की आवश्यकता पड़ेगी उसकी नापतौल करने के बाद ग्रामीणों को आश्वासन दे दिया कि अब आपके बच्चों को स्कूल मिल जाएगा।

नहीं है कई गांव के आसपास राजस्व की जमीन

उल्लेखनीय है कि जहां पर गांव बसा है वहां ग्रामीणों को करीब 20 साल पहले पट्टे दिए गए थे। पट्टे वन विभाग की जमीन पर दिए जाने के बाद ग्रामीण वहां बस गए। इसके बाद उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान कराने के लिए स्कूल तो स्वीकृत हुआ लेकिन वन विभाग की जमीन पर स्कूल निर्माण कराया गया। उस समय तत्कालीन अधिकारियों ने निर्माण रुकने के बाद दिलचस्पी नहीं दिखाई। लेकिन अब कलेक्टर उमा महेश्वरी के इस प्रयास से ग्रामीणों को स्कूल भवन की उम्मीद जगने लगी है।

लेप्स तक हो चुकी है राशि

स्कूल बनाने के लिए पूर्व में राशि लेप्स तक हो चुकी है। ऐसे में अब एक बार फिर नए सिरे से बजट आवंटन कराना पड़ेगा। ग्रामीणों के मुताबिक 28 बच्चों को अगर 15 बाई 10 का कक्ष भी बन जाता है तो बच्चें इसमें किसी भी मौसम में आसानी से बैठकर पढ़ लिख सकेंगे। स्कूल की हालात दयनीय है। 15 वाई 10 का कक्ष भी बन जाता है। इस संबंध में पनया गांव पहुंचे वन विभाग के एसडीओ आदित्य कुमार शांडिल्य से बातचीत करने का प्रयास किया गया तो नेटवर्क समस्या के चलते उनसे बातचीत नहीं हो सकी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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