शाढ़ौरा। नवदुनिया प्रतिनिधि

5 से 10 रुपए किलो बिकने बाला प्याज अब 50 से 60 रुपए के पार बिकने लगा है। वहीं लगातार बढ़ती प्याज की कीमत ने लोगों के आंसू निकाल दिए हैं, अब तो हालत यह है कि लोगों की थाली से प्याज ही गायब होने लगा है। बही प्याज को काटने पर लोगों को आसूं आते थे मगर अव खरीदने पर भी आसूं आ रहे हैं। शाढ़ौरा में प्याज करीब 50 रुपए किलो बिक रही है। प्याज के साथ-साथ सब्जियों के दाम भी आसमान छूने लगे हैं।

गरीबों की थाली में आसानी से मिलने वाला प्याज इन दिनों गरीब ही नहीं अन्य की थाली से भी दूर होता जा रहा है। लोगों को इनके बढ़ते दाम महंगाई के आंसू रूला रहे हैं। अभी यह बाजार में प्रति 50 से 60 रुपए किलो के भाव से मिल रहा है। ऐसे में यह प्याज आमजन के बूते से बाहर होता जा रहा है। स्वाद के लिए देखा जाए तो भोजन के साथ प्याज का अलग ही महत्त्व है। कुछ माह पहले तक प्याज बाजार में 20 से 25 रुपए बिक रही था। अभी इसके भावों में काफी बढोतरी हो गई है। करीब 50 - 60 रुपए किलो से लेकर 80 रूपए किलो के भाव से प्याज बिक रहे है। बही प्याज के साथ-साथ सब्जियों के दाम भी आसमान छूने लगे हैं, जिसकी वजह से दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं । सब्जी विक्रेताओं के अनुसार इसके पीछे बारिश तो जिम्मेदार है ही बही प्याज के दाम आसमान पर होने से सभी रसोईयों का बजट भी गड़बड़ाया गया है।

रसोईघर का बजट गड़बड़ाया

ग्रहणियों का कहना है कि एकाएक प्याज के भाव बढ़ने से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। इस कारण सब्जी अन्य खाद्य सामग्री में इसका उपयोग कम कर दिया गया है या फिर ऐसी खाद्य सामग्री कम बनाई जा रही है, जिसमें प्याज कम काम में लिया जाता है। प्याज के बढ़े भाव के चलते अब अधिकांश होटलों में भोजन के साथ परोसे जाने वाले सलाद से ही प्याज गायब हो गया है या फिर नाम मात्र का प्याज दिखाई दे रहा है।

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खबर नं.15

किसानों को अब कोंचा और मोला डेम से नहर खुलने का इंतजार

बंगलाचौराहा। नवदुनिया प्रतिनिधि सोयाबीन ओर उड़द की फसल की कटाई कर चुके किसानों को अब कोंचाबांध ओर मोलाबांध तालाब से निकली नहर खुलने का इंतजार है। क्योंकि नहर खुलते ही किसान अपने खेतों में पलेवा करने में जुट जाएंगे। यहां बता दें कि कोंचा ओर मोला नहर से हजारों हेक्टेयर भूमि में पलेवा होना है। जहां किसान नहर खुलते ही अपने खेतों में दिन ओर रात में पलेवा करके बोवनी की तैयारियां करेंगे। चूंकि भारी बारिश के बाद बारिश थमते ही किसानों ने बची फसल को गहा लिया है।जहां कई किसानों की फसलें बारिश से तवाह हो गई तो बहीं कई किसानों की मात्र लागत ही निकल पाई है। जहां अब इन किसानों की मेहनत रवी फसल पर ही निर्भर होकर रह जाती है और किसान अब खेतों में पलेवा करने के बाद गेहूं ओर चना की बोवनी करेंगे। हालांकि कोंचाबांध ओर मोला बांध तालाब से नहर खुलने के पूर्व सिंचाई विभाग द्वारा किसानों की एक बैठक आयोजित की जाती है।जहां नहर खुलने से लेकर किस तरह किन नियमों के तहत किसान अपने खेतों में पानी ले जाएंगे। किसानों को बताया जाता है। साथ ही नहर खुलने के पूर्व सभी माईनरों ओर छोटी बड़ी नहरों की साफ सफाई भी सिंचाई विभाग द्वारा की जाती है जिससे की पानी देते समय किसानों को कोई परेशानी न हो सके। इसके साथ ही दोनों बांधों से निकली मुख्य नहर ओर उप नहरों की साफ सफाई के लिए लाखों रुपए भी आते हैं, लेकिन अभी तक नहरों की साफ-सफाई नहीं की गई है। किसानों को इन दोनों डैमों की नहर खुलने का इंतजार है।

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फोटो109बी- मोला बांध की वह नहर जिसकी सफाई के बाद पानी छोड़ा जाएगा।

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खबर नं.16

भारतीय किसान संघ ने रक्तदान शिविर का आयोजन किया

अशोकनगर। नवदुनिया प्रतिनिधि भारतीय किसान संघ की ओर से 10 नवंबर को स्थानीय जिला चिकित्सालय में एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में 12 रक्तदाताओं ने रक्तदान किया। जिनमें राजकुमार सिंह रघुवंशी, श्रीमती सुषमा रघुवंशी, नारायण सिंह यादव, रामकिशन रघुवंशी, मोहनसिंह यादव, बाबूजी यादव, श्रीमती सबीता रघुवंशी, रामवीर तिवारी, सुखदेव प्रसाद दुबे, शानू शर्मा, वीरेन्द्र सिंह रघुवंशी और गायत्री रघुवंशी शामिल थे। यह शिविर दत्तोपंत ठेंगडी की 100 वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया गया था।

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फोटो109- भारतीय किसान संघ ने रक्तदान शिविर का आयोजन किया।

Posted By: Nai Dunia News Network