आकाश सिंह भदौरिया। अशोकनगर

साफ्टवेयर की एक खामी ने करोड़ों की निजी जमीन को सरकारी बना दिया है। जिले के कई इलाकों में प्राइवेट जमीन के खसरों पर काबिल कास्त लिखकर आने लगा है। यह काबिल कास्त पट्टे पर दी जाने वाली सरकारी जमीन पर लिखा जाता है, मगर अफसरों का मानना है कि वेब जीआइएस सॉफ्टवेयर में तकनीकि खराबी के कारण ऐसा हुआ है। इसकी वजह से प्लॉट, घर आदि की खरीद-फरोख्त भी रुक गई है। पंजीयक कार्यालय ऐसी जमीनों की रजिस्ट्री नहीं कर रहा है। पंजीयक कार्यालय ने तहसीलदार को पत्र लिखकर पूछा है कि आखिर इस काबिल कास्त का अर्थ क्या होता है?

प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़ी तिरुपति इंफ्रा फिन कंपनी की विदिशा रोड पर ढाई बीघा के करीब जमीन है। इस जमीन के खसरे में काबिल कास्त लिखकर आ रहा है। इसी तरह शहर की अन्य कई जमीनों पर भी यही स्थिति है। उक्त जमीनों के विक्रय के लिए जब खसरा निकलवाए गए, तो इसके कॉलम नंबर 12 में काबिल कास्त लिखा देखकर जमीन मालिकों की भी चिंता बढ़ गई है। पंजीयक कार्यालय में उन्हें कहा जा रहा है कि यह तो पट्टे की सरकारी जमीन है। इसका विक्रय नहीं किया जा सकता। 13 अक्टूबर से इस तरह की त्रुटि सामने आई है। मालूम हो, कि वेब जीआइएस के माध्यम से राजस्व विभाग के रिकॉर्ड को ऑनलाइन किया गया है। इससे निर्धारित फीस जमा करने पर एक क्लिक पर खसरा, खाता व नक्शा की सर्टिफाइड प्रति मिल जाती है।

हर दिन डेढ़ लाख के राजस्व का नुकसान :

निजी जमीन के खसरा में काबिल कास्त लिखकर आने से सिर्फ जमीन मालिक ही नहीं, बल्कि पंजीयक कार्यालय को भी नुकसान हो रहा है। पंजीयन के लिए हर दिन आने वाली 20 से 25 रजिस्ट्रियों में से 5 से 7 रजिस्ट्री ऐसी हैं, जिनमें काबिल कास्त लिखा होता है। इनकी रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। इससे पंजीयक कार्यालय को करीब एक से डेढ़ लाख रुपए के राजस्व का हर दिन नुकसान हो रहा है।

पटवारी ने कहा- तीन माह का लगेगा समय :

शहर पटवारी दीपक रघुवंशी ने कहा कि सॉफ्टेवयर में तकनीकि खराबी के कारण यह गड़बड़ी भोपाल स्तर पर वेब जीआइएस से हुई है। इसके कारण खसरों के कॉलम 12 में काबिल कास्त लिखकर आ रहा है। हमने इस संबंध में भोपाल भी बात की है। वहां से पता चला है कि इसे ठीक होने में करीब तीन माह का समय लग जाएगा।

इनका कहना :

- 13 अक्टूबर से खसरों में काबिल कास्त लिखकर आ रहा है। हमने उसी दिन इस संबंध में तहसीलदार को पत्र लिखकर पूछा था कि काबिल कास्त क्या होता है, वहां से अभी जवाब नहीं आया है, फिर से उन्हें रिमाइंडर भेजा गया है। ऐसे हर दिन पांच से सात मामले आ रहे हैं।

डीसी बाथम, उप पंजीयक

- काबिल कास्त की चार से पांच शिकायत आईं हैं। काबिल कास्त, यानि कि सरकारी जमीन होना होता है। हमने इस संबंध में उच्च स्तर पर सूचित कर दिया है।

रवि मालवीय, एसडीएम

Posted By: Nai Dunia News Network

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