बालाघाट, गोरेघाट।नईदुनिया न्यूज। पिछले माह लगातार वर्षा की वजह से खेतों में लगी धान की फसल बह गई।जिसमें कुछ जगह बची धान पर अब बीमारी का प्रकोप लग रहा है।ऐसे में किसान धान को बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव कर रहे है।लेकिन धान के पौधा का तना खाली होने के साथ में पत्तियां सूखने लगी है।दरअसल, गोरेघाट, कुडवा, भोंडकी, हेटी सहित आसपास के गांवों के खेतों में करीब 30 एकड़ धान की फसल में पोंगा बीमारी लगी हुई है।बीमारी लगने से किसानों में चिंता बढ़ गई है।

गोरेघाट के किसान मानकलाल जामुनपाने, हरि किशन नागोसे, शिव कुमार सिवने ने बताया कि पठार क्षेत्र में अतिवर्षा होने से पहले नदी नाले वाले खेतों में लगी धान की फसल बह गई।लगातार वर्षा के कारण किसानों के खेतों में धान की फसल में अनेक प्रकार की बीमारी जैसे पोंगा बीमारी लगने से धान का पौधा सूख रहा है जिससे धान की फसल होना मुश्किल हो गया है।किसान तुमसर में जाकर दवाई दुकान में जाकर किसान अनेक प्रकार की महंगी दवाइयों का खेतों में छिड़काव कर रहे है।लेकिन बीमारी रूकने का नाम नहीं ले रही है।इससे उनके सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है।किसानों का कहना है कि धान का बीज और रोपाई में जितना खर्च आया।फसल पकने के बाद उतना मूल्य निकल पाना मुश्किल है।

सोसायटी में कर्ज भरने में होगी परेशानी

किसानों ने बताया कि हर साल सेवा सहकारी समिति मर्यादित से धान की रोपाई के पहले यूरिया,डीएपी खाद उधारी में लेकर आ जाते है। जब धान की कटाई कर मिसाई करने के बाद उसके बाद सोसायटी में भुगतान कर देते है। लेकिन इस साल धान की फसल में बीमारी लगने से पूरी फसल चौपट होने लगी है।वहीं दूसरी ओर पिछले माह आई लगातार वर्षा ने फसल बहाकर ले गई।ऐसे में सोसायटी से हुआ खाद का भुगतान कैसे कर पाएंगे उनके सामने परेशानी बढ़ गई है।क्योंकि किसान खेती के भरोसे ही परिवार की जीविका चलाता है।

इनका कहना

धान की फसल में बीमारी लगने पर कृषि विभाग से किसानों को सलाह लेकर दवाई का छिड़काव करना चाहिए।ताकि लगने वाली बीमारी दूर हो सके।खेतों में बीमारी लगने पर बिना जानकारी लेकर छिड़काव करने पर नुकसान होने की संभावना बनी होती है।

डा. आरएल राऊत, प्रमुख वैज्ञानिक, कृषि वैज्ञानिक केंद्र बड़गांव बालाघाट।

Posted By: Jitendra Richhariya

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