माही महेश चौहान बालाघाट

गरीब की थाली भरी रही है और उसे भरपेट भोजन मिल सके इसके लिए सरकार एक रुपये किलो की दर गेहूं व एक रुपये किलो की दर से चावल समेत अन्य खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत निश्शुल्क गेहूं चावल उपलब्ध करा रही है, लेकिन बालाघाट में ऐसे पात्र हितग्राही अब सरकार की इन योजनाओं के तहत गेहूं को प्राप्त नहीं कर पा रहे और उनकी थाली में रोटी नहीं आ पा रहे है। ऐसा सिर्फ इसलिए हो पाया है कि बालाघाट सबसे अधिक धान का उत्पादक जिला है जिसका खामियाजा यहां के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

केंद्र का मानना सिर्फ चावल ही खाते है बालाघाट के लोगः बता दें कि केंद्र सरकार का ऐसा मानना है कि मध्यप्रदेश का बालाघाट बहुताय में धान का उत्पादन करता है और यहां के लोग सिर्फ चावल को ही खातें हैं। जिसके चलते ही जून माह से बालाघाट को मिलना वाला गेंहूं का आवटन बंद कर दिया गया है और उसके बजाय चावल ही प्रदाय किया जा रहा है। खाद्य व आपूर्ति विभाग के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर ऐसे सर्वे करवाए जाते है और सर्वे के बाद तैयार रिपोर्ट के बाद ही धान उत्पादन वाले जिलों में बालाघाट के साथ ही मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया को भी शामिल किया गया है, जहां गेहूं का आवंटन बंद कर दिया गया है।

बालाघाट जिले के पात्र हितग्राहियों को शासकीय उचित मूल्य की राशन दुकानों से एक रुपये किलो गेहूं व एक रुपये किलो चावल प्रदाय किया जाता है और जिले में एक हितग्राही को दो किलो गेहूं व तीन गेहूं चावल दिया जाता है और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 15 किलो चावल व 10 किलो गेहूं का आवंटन हितग्राहियों को किया जा रहा था लेकिन अब गेहूं आवंटन ही बंद कर दिया गया है।

प्रस्ताव पर भी नहीं दिया गया ध्यानः खाद्य व आपूर्ति विभाग से केंद्र द्वारा जिले की आवश्यकता अनुसार की स्थिति को मांग की गई थी इस पर जिले से एक किलो गेहूं व चार किलो चावल एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 30 किलो चावल व पांच किलो गेहूं का आवंटन किए जाने का प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन इस मांग पर भी केंद्र शासन द्वारा ध्यान नहीं दिया गया है।

छह हजार मीट्रिक टन की जिले को गेहूं की प्रतिमाह आवश्यकताः जिले की शासकीय उचित मूल्य की 654 राशन दुकानों से कुल तीन लाख 30 हजार 641 पात्र हितग्राहियों को नियमित योजना व गरीब कल्याण योजना के तहत करीब 6 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आवश्यकता होती है। यहां राशन दुकानों से एक रुपये किलो के भाव से नियमित रुप से दो हजार 108 मीट्रिक टन व गरीब कल्याण योजना के तहत 3 हजार 49 मीट्रिक टन का आवंटन होता है जो कुल 6 हजार मीट्रिक टन होता है।

परेशान हो रहे हितग्राहीः राशन दुकानों में राशन लेने पहुंचने वाले हितग्राही गेहूं का आवंटन न होने से परेशान हो रहे है।राशन दुकान से गेहूं न मिलने पर नाराजगी जताते हुए हितग्राहियों ने बताया कि एक रुपये किलो व निश्शुल्क गेहूं का वितरण किए जाने से रोटी बनाकर भी खा रहे थे लेकिन अब यहां से गेहूं नहीं मिल रहा है और अब महंगे दाम में गेहूं खरीदना मजबूरी बन जाएगा।

इनका कहना...

केंद्र सरकार द्वारा समय-समय में अधिक धान का उत्पादन करने वाले जिलों का सर्वे कराया जाता है और जिले से भी आवश्यकता के आधार पर मांग भी मंगाई जाती है। मांग के आधार पर नियमित आवंटन के लिए चार किलो चावल व एक किलो गेहूं एवं गरीब कल्याण योजना के तहत 30 किलो चावल व पांच किलो गेहूं की मांग भेज गई है, लेकिन जून माह में सिर्फ चावल का ही आवंटन किया गया है।

-ज्योति बघेल आर्य, जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी, बालाघाट।

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