बालाघाट। नईदुनिया प्रतिनिधि।

मध्यप्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचने वाले बच्चों से कुपोषण दूर करने के लिए उनके पोषण आहार में अंडा वितरण करने का निर्णय लिया है और इस निर्णय के तहत अप्रैल माह से आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण आहार में अंडा परोसने की प्रक्रिया को शामिल करने की कार्रवाई भी की जाएगी। सरकार के इस फैसले के विरोध में बहुत से लोग आगे आ रहे है। इसी कड़ी में सोमवार को वैश्य महासम्मेलन ने अंडा के आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग को लेकर एसडीएम केसी बोपचे को ज्ञापन सौंपा हैं।

पूर्व सरकार ने भी साधू-संतों के आग्रह पर रोका था निर्णय : ज्ञापन सौंपने के दौरान वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश मंत्री सत्यनारायण अग्रवाल, जिलाध्यक्ष तपेश असाटी ने बताया कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में नास्ता, भोजन में अंडे देने का निर्णय लिया है जो कि गलत है। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में अंडा के स्थान पर शाकाहारी, फलाहारी भोज्य पदार्थ बेहतर दिए जाएं जिससे कि बच्चों के अंदर से कुपोषण दूर हो सके। उन्होंने बताया कि इसी तरह का निर्णय पूर्व सरकार ने भी लिया था लेकिन मुनियों, धर्माचार्य व साधू-संतों के आग्रह पर निर्णय पर रोक लगा दी थी लेकिन वर्तमान सरकार इसका विरोध करने के बाद भी अप्रैल माह से प्रक्रिया को लागू कर रही है जो कि न्यायसंगत नहीं हैं।

मांसाहार के बदले शाकाहार को महत्व दे सरकार : पदाधिकारियों ने बताया कि हमारा देश भगवान महावीर के जिओ और जीने दो व महात्मा गांधी की अंहिसावादी विचाराधारा का देश है। इसे ध्यान रखते हुए शासन को मांसाहार को बढ़ावा न देकर शाकाहार को महत्व देने की आवश्यकता है। इसलिए वैश्य महासम्मेलन सरकार से मांग करता है कि वे अपने निर्णय को तत्काल रोके और शाकाहार को बढ़ावा देने का प्रयास करे अन्यथा सरकार के इस निर्णय के विरोध आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इस दौरान सुभाष गुप्ता, नगरध्यक्ष अक्षय कांकरिया समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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