कटंगी (नईदुनिया न्यूज)। प्रदेश में तीन साल पहले एक दिन में 2 जुलाई को 6 करोड़ पौधे लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उसी क्रम में जनपद पंचायत कटंगी की 42 पंचायतों में लगभग 50,000 पौधे लगवाए थे। यह कुछ ऐसे आंकड़े हैं जो सुनने में बहुत अच्छे लगते हैं।

इन्हें सुनकर लगता है प्रदेश में बहुत तेजी से पौधरोपण कार्यक्रम चल रहा है और जल्द ही हर तरफ हरियाली ही हरियाली होगी। लेकिन इन लुभावने आंकड़ों के साथ यह सवाल भी उठता है कि जमीन पर आखिर कितने पौधे बचे हैं। दरअसल, धनकोषा, सीताखोह, घुनाड़ी में करीब 200 की संख्या में सूखे पौधे मिले। इसमें लगी मेहनत संरक्षण के अभाव में दम तोड़ दी। इन पौधों को वर्ष 2017-18 में लाखों की संख्या में पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान यहां भेजे गए थे।

यहां पौधे हुए सक्सेसः जिले के वन विकास निगम लामता प्रोजेक्ट के माध्यम से लगाए गए गर्रा, वारासिवनी, कटंगी के रेलवे स्टेशनों में लाखों की संख्या में लगे पौधे आज 90 प्रतिशत विकसित होकर लहरा रहे हैं। कटंगी रेलवे स्टेशन की लगभग 10 एकड़ खाली जमीन में डिप्टी रेंजर गोविंद वासनिक ने 16,127 पौधों को लगवाए थे जो आज परिपक्व हो चुके हैं। इसमें लगे पौधे मिश्रित जाति के है और वे 90 प्रतिशत के लगभग सफल हुए हैं। वहीं हितग्राही मूलक योजना के अंतर्गत फलदार पौधों का रोपण अगासी के किसान खोवेंद्र तुरकर ने किया। जिसमें आम के 100 व मुनगे के 200 पेड़ परिपक्व हो गए है।

सड़क किनारे पौधे नहीं रहे जीवितः प्रधानमंत्री जन कल्याण के जिला सदस्य संतोष राहंगडाले ने बताया कि वर्ष 2017-18 में पठार क्षेत्र की पंचायतों में मार्ग के दोनों तरफ पौधरोपण कार्यक्रम चलाया गया था।

185 से 190 किमी के बीच 8030 पौधे लगाए गए थे, लेकिन मौके पर सारे पौधे सूखे मिलते हैं। बहुत का तो अस्तित्व ही नहीं मिलता। यहां का हाल देख लगता है काम के नाम पर केवल एक बोर्ड खड़ा कर दिया गया है और जमीन पर कुछ नहीं हुआ। अन्नदाता किसान संगठन के सदस्य खोवेंद्र तुरकर ने बताया कि पौधे लगाने में एक सामूहिक पहल होनी चाहिए जो होते नहीं दिख रही है। कहीं न कहीं पेड़ लगाना एक फैशन बन गया है पेड़ लगाओ फोटो खिंचाओ और फिर एक बड़ा सा रिकॉर्ड बनाकर सब भूल जाओ। ज्यादातर पौधरोपण कार्यक्रम में यही चल रहा है।

इसीलिए आती है दिक्कतः डिप्टी रेंजर गोविंद वासनिक ने बताया कि अब जब रिकॉर्ड बनाने के लिए पौधरोपण कार्यक्रम चलाए जाएंगे तो दिक्कत आनी है। क्योंकि जब रिकॉर्ड बनाने के लिए काम कर रहे हैं तो वहां काम कहीं पीछे छूट जाता है। रही बात पौधे लागने की तो यह पूरी प्रक्रिया का सिर्फ 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा है।

बाकी इसके बाद उन पौधों की देखभाल भी बहुत जरूरी है जहां हम ठीक नहीं कर पा रहे हैं। रेंजर हिमांशु राय ने बताया कि दक्षिण वन मंडल कटंगी लगाए गए पौधों को बचाए रखने की जिम्मेदारी हम सिर्फ विभागों तक सीमित नहीं रख सकते हैं। लोगों को भी इसमें शामिल होना होगा। ऑक्सीजन की जरूरत सबको है।

चल रहे पौधरोपण कार्यक्रमों को एक फैशन कार्यक्रम के तौर पर देखते हैं वह कहते हैं कि आजकल फैशन के तौर पर पौधों को लगाने का टारगेट रखा जा रहा है। ऐसा नहीं है कि पेपर पर प्लान बनाया कि इतने पेड़ हम लगाएंगे और लगाकर आ जाएंगे। किसी भी एजेंसी का बजट देखेंगे तो उसमें कहीं भी पेड़ों के रखरखाव का बजट नहीं होता है। ऐसे में रखरखाव की ओर किसी का ध्यान नहीं होता।

सिर्फ नंबर की तरफ ध्यान रहता है। फोकस यह नहीं होना चाहिए कि हम कितने ज्यादा नंबर में पौधे लगाएंगे बल्कि फोकस यह होना चाहिए कि हम लगे हुए पौधों को कैसे बचा रहे हैं। पौधारोपण एक दिन का काम नहीं होता। यह एक लंबी प्रक्रिया है।

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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