कटंगी (नईदुनिया न्यूज)। सेवा सहकारी समिति खैरलांजी में सुरजलाल तुरकर ब्रांच मैनेजर पर डेढ़ करोड़ रुपये गबन और किसानों एवं अमानत दारो से की ठगी करने का आरोप है। ब्रांच मैनेजर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सेवा सहकारी समिति सालेटका ने सात लाख 62 हजार रुपये सेवा सहकारी समिति अतरी के केश क्रेडिट खाते में नाम कर उक्त राशि अपने स्वयं के खर्च में लाकर अमानत में खयानत कर गबन किया है। इसके बाद भी उसे सजा करने की बजाय उपकृत कर बैंक ने दोबारा मैनेजर बना दिया गया है।

दरअसल, जिला सहकारी बैंक बालाघाट की बैंक खैरलांजी शाखा में अक्टूबर 2014 से फरवरी 2018 के बीच तत्कालीन मैनेजर सुरजलाल तुरकर ने आठ करोड़ 30 लाख रुपये का गबन कर लिया। वहीं जिला सहकारी बैंक खैरलांजी उच्चाधिकारियों के मामला ध्यान में आने के बाद मैनेजर से कुछ रिकवरी हो पाई है। गबन के मामले में बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक सुरजलाल की लापरवाही सामने आई है। मैनेजर को गबन का दोषी मानते हुए पदोन्नात कर मुख्यालय की प्रधान शाखा बालाघाट में पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया गया था। इसी बीच महाप्रबंधकों का तबादला हो गया। वर्तमान प्रबंधन ने इसे राजनैतिक संरक्षण के कारण जिला सहकारी बैंक शाखा डोंगरमाली का ब्रांच मैनेजर बना दिया है।

बता दें कि यह मामला प्रकाश में आने के सहायक रजिस्ट्रार सहकारिता समितियां बालाघाट आलोक दुबे ने उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया है। जांच अधिकारी केसी बाहेश्वर एवं बैंक के अधिकारी एके जायसवाल को बनाया गया है। खास बात यह है कि बैंक अफसरों जिनमें तीन-तीन महाप्रबंधक पीएस धनवाल, कुर्मी, डीके सागर का स्थानांतरण हो चुका है, लेकिन सुरजलाल तुरकर के कांग्रेसी नेताओं जिसमें पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल एवं सांसद विश्वेश्वर भगत से निजी संबंध होने के कारण अब तक इस मामले में पुलिस में मुकदमा दर्ज नहीं करवाया है। अफसरों का कहना है कि अभी तक प्रारंभिक जांच ही की गई है। विस्तृत विभागीय जांच में पूरा मामला सामने आने पर पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा। इसकी विभागीय जांच होने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना ऊपर से इसे उपकृत कर डोंगरमाली का महाप्रबंधक बनाना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है।

सात साल तक की नौकरीः जिला सहकारी को आपरेटिव बैक बालाघाट की शाखा में सुरजलाल तुरकर ने वर्ष 2012 में ज्वाइन की थी। सात साल की नौकरी करने के बाद ही अक्टूबर 2014 से मैनेजर ने शाखा में गबन करना शुरू कर दिया। इस दौरान बैंक के जिम्मेदारों ने उनकी हरकतों पर गौर नहीं किया। प्रारंभिक पड़ताल में पता चला कि मैनेजर ने शुरूआत में छोटी-छोटी गड़बड़ी की और बाद में सेवा सहकारी समिति के लेखपाल अंकेश कुमार नगपुरे के साथ मिलीभगत से केश बुक में हेरफेर डे बुक में हेरफेर, ओवर ड्राफ्ट करने में अनियमितताएं करके जमा अमानतों में हेरफेर का सिलसिला फरवरी 2014 तक चलता रहा।

कार्रवाई की मांगः चार साल में मैनेजर ने जहां-जहां पदस्थ रहा वहां लगभग आठ करोड़ 30 लाख रुपये का गबन कर दिया। जिसमें खैरलांजी, सावरी, कटोरी समितियों के दर्जनों किसान जैसे सुभाष पिता श्यामलाल कटोरी, नंदकिशोर पिता मोहन, सुभाष पिता दयाराम भंडारबोड़ी, देवेंद्र प्रसाद पिता रामचंद भंडारबोड़ी जैसे किसानों के साथ साथ अधीनस्थ समितियों में भी भारी गड़बड़ी की है। किसान दुगलाल तुरकर एवं शिवप्रसाद शर्मा ने उप रजिस्टार एवं महाप्रबंधक से इसे निलंबित कर उच्चस्तरीय जांच सहकारिता अधिनियम 1960 की धारा के अंतर्गत करवा कर इस पर लंबित पुलिस मुकदमे दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।

प्रारंभ जांच में शाखा के ब्रांच मैनेजर सुरजलाल तुरकर आठ करोड़ 30 लाख का दोषी माना है। मेरे पास में हाल ही में रिपोर्ट आते ही मुख्यालय को अवगत करवाया दिया गया। मैनेजर पूर्व में ही डिमोशन कर मुख्यालय पर बुला लिया गया था।

संतोष शुक्ला, महाप्रबंधक सेंट्रल आपरेटिव

बैंकमैनेजर ने ब्रांच में गबन किया है। इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए थे। मैनेजर से रिकवरी के है।

आलोक दुबे, प्रशासक एवं

उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां बालाघाट।

Posted By: Nai Dunia News Network

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