गुनेश्वर सहारे

बालाघाट (नईदुनिया)।

बालाघाट से बैहर मार्ग पर पड़ने वाले 52 मोड़ गांगुलपारा पहाड़ी वाला घाट जिले में ही नहीं अपितु अनेक जगहों तक विख्यात है। इस घाट पर बाइक चलाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है, लेकिन साइकिल से पहाड़ी वाले इस घाट पर एक डॉक्टर रोजाना 30 किमी तक साइकिल चला रहे है। हम बात कर रहे है ग्राम भरवेली निवासी डॉ. जितेंद्र सोनी 38 वर्ष की। रोजाना सुबह चाहे बारिश हो या फिर भीषण गर्मी का समय, वे घाट पर ही साइकिल चलाते हैं। उनके साइकिल चलाने के बाद से गांव के दस लोगों ने साइकिल चलाना शुरू कर दिया, लेकिन वह अकेले ही पहाड़ी वाले घाट पर साइकिल चलाने जाते हैं। इससे वह हमेशा अपने आप का तरोताजा महसूस करते हैं।

डॉ. जितेंद्र सोनी बताते हैं कि उनका निजी क्लीनिक है। माह जुलाई 2020 से एक नई साइकिल लेकर साइकिलिंग करना शुरू किया। वह रोजाना अपने ग्राम से गांगुलपारा घाट के बंजारी घाटी तक साइकिल चला रहे हैं। साइकिल चलाने की मन में इसीलिए ठानी, क्योंकि वर्तमान में युवा पीढ़ी ने भी साइकिल को दरकिनार कर दिया है और ज्यादातर बाइक से चलना पसंद कर रहे हैं। चाहे वह फिर युवा हो या अन्य वर्ग। उनके क्लीनिक में इलाज कराने आने वाले लोगों को वह साइकिल चलाने के प्रेरित करते हैं। इसका यह परिणाम है कि एक साल से दस लोग साइकिल चलाने लगे हैं और उनकी सेहत में सुधार आया है। सभी लोगों को कोरोना की पहली लहर से लेकर दूसरी लहर गुजरने लगी पर संक्रमित नहीं हुए। वे बताते हैं कि जिस दिन साइकिल नहीं चलाते हैं, उस दिन पैदल भरवेली से काली पुतली बालाघाट और भरवेली से टेकाड़ी नाका तक 16 किमी तक पैदल चलते हैं। इतना ही नहीं रिश्तेदारी में यदि अकेले जाना पड़ गया तो पहली प्राथमिकता साइकिल को ही देते हैं।

फोकस पॉइंट-

- रोजाना सुबह पांच बजे निकलते हैं साइकिल चलाने।

- भरवेली से बंजारी घाटी 15 किमी आना और 15 किमी जाना यानी 30 किमी।

- एक घंटे में प्लेन सड़क पर 30 किमी दूरी कर लेते हैं तय।

- सवा दो घंटे में 70 किमी दूरी करते हैं तय।

- साइकिल की स्पीड रहती है 30 किमी प्रति घंटा।

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सेहतमंद रहना है तो साइकिल रोजाना चलाना चाहिए। इससे पूरा शरीर फीट रहता है और बीमारी भी दूरी होती है। भरवेली के डॉ. जितेंद्र सोनी रोजाना गांगुलपारा घाट पर साइकिल चलाकर युवाओं के लिए एक अच्छी मिसाल पेश कर रहे हैं। साइकिल चलाने से फेफड़े मजबूत होते है। साथ ही पूरा शरीर भी तंदुरुस्त रहता है और साइकिल चलाने वाले बहुत कम ही बीमारी की चपेट में आते हैं।

-डॉ. मनोज पांडेय, सीएमएचओ बालाघाट।

Posted By: Nai Dunia News Network

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