गुनेश्वर सहारे, बालाघाट। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की गेट के समीप सरकारी स्कूल की तस्वीर पर्यटकों के सहयोग से बदल गई है। बालाघाट जिले के इस आदिवासी गांव के इस स्कूल में निजी स्कूलों की तरह विद्यार्थियों के लिए सभी सुविधाएं हैं। शैक्षिक कार्यक्रम देखने एलइडी टीवी, लाइब्रेरी, खेल सुविधाएं, फर्नीचर सहित अन्य संसाधन पर्यटकों की मदद से मिल पाए हैं।

बालाघाट जिले के ग्राम मंजीटोला में शासकीय प्राथमिक स्कूल में पर्यटकों ने सुसज्जित बैठक व्यवस्था एलईडी के माध्यम से नित्य हाइटेक पढ़ाई, लाइब्रेरी की सुविधाएं, खेल स्पर्धाओं के लिए अभ्यास के सभी उपकरण सामग्री समेत सभी संसाधन इस स्कूल को मुहैया कराए हैं।

जिले के अन्य सरकारी स्कूलों के लिए यह स्कूल प्रेरणा व मिसाल बनकर उभर रहा है। गांव के लोग सैलानियों के प्रयास को श्रेय देते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी कि इस तरह की सुविधा पूर्ण और हाइटेक शिक्षा उनके स्कूल और आदिवासी बच्‍चों को मिल सकेगी।

स्वेच्छा से देते हैं पर्यटक सामग्री: ग्रामीण विनोद धुर्वे, नरेश मर्सकोले ने बताया कि शासकीय प्राथमिक शाला मंजीटोला कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के मुक्की गेट से साढ़े तीन किलोमीटर दूर है।

अधिकतर पर्यटक मुक्की गेट से सफारी करने स्कूल के पास से जाते हैं। सड़क किनारे स्कूल होने से पर्यटक घूमते हुए आते हैं और अपनी इच्छा अनुसार स्कूल को सामग्री प्रदान करते हैं। बिना किसी सरकारी खर्चे और मेहनत से आज स्कूल सभी प्रकार से निजी स्कूलों को टक्कर देने में सक्षम हो गया है।

अब गांव का हर कोई बच्‍चा स्कूल आने लालायित नजर आता है और बच्‍चों को स्कूल भेजने से गुरेज करने वाले पालक भी बच्‍चों को स्कूल में दाखिला दिलाने प्रयासरत हैं। कभी दो से चार की संख्या वाले इस स्कूल में वर्तमान में 28 बच्‍चों की संख्या हो गई है।

पर्यटकों ने ये सामग्री की प्रदान: पर्यटकों ने स्कूल में बच्‍चों को बैठने के लिए फर्नीचर, सीलिंग पंखे, दीवार घड़ी, एलईडी टीवी जिसमें बच्‍चे ज्ञानवर्धक कार्यक्रम देखते है। बच्‍चों के लिए खेल सामग्री के आलवा सुसज्जित लाइब्रेरी में पुस्तकें हैं। इसके साथ में बच्‍चों के लिए शौचालय की सुविधा है।

पांच साल पहले हुई शुरुआत: अभिभावक घनश्याम मरावी ने बताया कि पांच साल पहले चेन्नई निवासी पर्यटक याला मंचली कान्हा घूमने आए थे, उन्होंने स्कूल के लिए शौचालय बनवाया और एक एलईडी दी थी। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का मुक्की गेट बैहर से मंजीटोला सड़क किनारे है। इस मार्ग से पर्यटक आते -जाते हैं और अधिकांश रिसार्ट इसी मार्ग में है, जिससे पर्यटक घूमते हुए स्कूल पहुंच जाते हैं। स्कूल में पर्यटक आते हैं और अपनी इच्छा अनुसार सामग्री खरीदकर देते हैं। इसके लिए स्कूल तरफ से न तो कोई बोर्ड लगा है और नहीं किसी की एप्रोच लगाते हैं। अभी तक पांच पर्यटकों ने स्कूल को सामग्री प्रदान की है।

इनका कहना है

कान्हा आने वाले पर्यटक घूमते- फिरते स्कूल तक आते हैं। बच्‍चों को पढ़ाई में सुविधा मिले, इस तरह की सामग्री देकर जाते हैं। स्कूल में एलईडी से लेकर अन्य सामग्री पर्यटकों द्वारा प्रदान की गई है। इससे बच्‍च्‍चों को पढ़ाई करने और शिक्षकों को पढ़ाई करवाने में मदद मिलती है। सामग्री के लिए किसी को भी एप्रोच नहीं लगाते है। पर्यटक अपनी इच्छा से सामग्री देते हैं।

सोहनलाल दमाहे, प्रधानपाठक, शासकीय प्राथमिक शाला मंजीटोला, बालाघाट

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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