वारासिवनी (नईदुनिया न्यूज)। नगरपालिका परिषद वारासिवनी के हालत बेहाल है। यहां पर कर्मचारियों को तीन-तीन माह तक वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा है।पिछले कई वर्षों से राजनेताओं की राजनीति के चलते नगरपालिका परिषद में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की मनमानी नियुक्तियां कर ली गई हैं। ऐसे में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नगरपालिका द्वारा समय पर भुगतान नहीं किए जाने से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, नगरपालिका परिषद में मुफ्तखोर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति का कार्य वर्ष 2010 की परिषद से प्रारंभ हुआ,जो लगातार 10 वर्षों तक चला। वोट की राजनीति के तहत भर्ती किए गए इन दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी में से कुछ कर्मचारी नेताओं की जी हुजूरी कर उनके घर व बाहर के कामों में लगे रहते हैं तो कुछ पार्षदों के काम करते रहते हैं। इनके अलावा शेष बचे हुए कर्मचारियों द्वारा नगरपालिका में जाकर अपनी हाजिरी लगाने के बाद अपने दूसरे निजी कार्यों में व्यस्त हो जाते हैं।

नगरपालिका की स्थिति यह हैं कि जितने कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं हैं उससे अधिक कर्मचारी भर्ती कर लिए गए हैं। जिसके कारण नगरपालिका की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई हैं। दूसरी ओर नगरपालिका में 10 वर्षों तक शासन करने वाले अध्यक्ष व पार्षदों ने कभी भी नगरपालिका के राजस्व को बढ़ाने का कोई प्रयास भी नहीं किया।नगरपालिका के संपूर्ण विकास कार्य सिर्फ शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली राशि पर ही निर्भर रहते हैं।यदि शासन से नगर विकास के लिए राशि नहीं आए तो अपने बलबूते पर नगरपालिका नगर की सफाई व्यवस्था को भी नहीं संभाल सकेगी और ना ही कर्मचारियों का वेतन दे पाएगी।

राजस्व बढ़ाने में अधिकारियों का ध्यान नहीं: वैसे तो नगरपालिका में बैठे हुए अधिकारी कर्मचारी चाहे तो नपा के राजस्व में वृद्धि कर सकते है,लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण यह अधिकारी कर्मचारी पहले अपनी जेब देखते हैं। बाद में नगरपालिका के राजस्व की चिंता करते हैं।नगर में लगातार निर्माण कार्य चल रहे हैं, लेकिन अधिकांश निर्माण कार्यों की अनुमति निर्माण कर्ता द्वारा नगरपालिका से नहीं ली गई।जिसके कारण नगरपालिका को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा हैं,किंतु इसकी ओर नगरपालिका के अधिकारियों, उपयंत्रियों,राजस्व निरीक्षकों आदि किसी को नहीं हैं।नगर में मनमाने तरीके से निर्माण कार्य हो रहे हैं जिससे कई परेशानियां बाद में खड़ी हो जाती हैं।कई स्थानों पर तो नागरिकगण नियमों की अवहेलना कर निर्माण कार्य कर रहे है। जिसकी जानकारी मिलने पर अधिकारीगण स्थल पर पहुंच कर निर्माणकर्ता को चमका कर अपनी जेब भर लेते हैं और कोई कार्रवाई नहीं करते हैं।

150 सफाई कर्मचारी होने के बाद भी कचरे का अंबारः नगरपालिका में लगभग 150 सफाई कर्मचारी होने के बावजूद भी नगर में कचरों का ढेर लगा रहता है।नई पदस्थ सीएमओ दिशा डहेरिया ने जब सफाई को लेकर सफाई कर्मचारियों पर नकेल कसने का प्रयास किया तो वह हड़ताल पर उतारु हो गए और वेतन बढ़ाने की मांग करने लगे।जबकि स्थिति यह हैं कि जब वह पहली बार सफाई कर्मचारियों से रुबरु हुई थी तो मस्टर रोल में जितने कर्मचारियों की हाजिरी थी।उससे आधे कर्मचारी भी उपस्थित नहीं हो पाए थे।

जब नई सीएमओ दिशा डहेरिया ने प्रभार संभाला था, तब वह कर्मचारियों की संख्या को जानकर हैरान रह गई थी। उन्हें यहीं समझ नहीं आया था कि आखिर नगरपालिका में इतने कर्मचारियों की आवश्यकता क्यों हैं, लेकिन फिलहाल वह भी अभी तक इन कर्मचारियों पर नकेल नहीं कस पाई हैं। नगरपालिका की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण विकास कार्य तो लगभग ठप हैं। नगरीय क्षेत्र में जो भी सड़क आदि का निर्माण कार्य हो रहा हैं वह भाजपा की प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री अधोसंरचना मद की राशि प्रदान की गई है, उससे हो रहा हैं। यदि शासन से विकास कार्यों के लिए राशि नहीं मिले तो नगर में कोई भी विकास कार्य नहीं हो सकता है।

इनका कहना

आकस्मिक निरीक्षण करने पर पाया गया है कि नगर के इंडौर स्टेडियम में दो कर्मचारी की ड्यूटी थी।उसमें से

एक कर्मचारी गायब पाया गया। जिसका वेतन काटने के निर्देश दिए गए है।मंगलवार से राजस्व वसूली के लिए टीम बनाकर वार्ड में जाकर बकाया वसूली की जाएगी।शासन से पैसों की की जा रही है।दैनिक वेतन भोगी नौ कर्मचारियों निकाल दिया गया।साथ ही आवश्यकता से अधिक कर्मचारी है जिनका काम नहीं है उन्हें हटाया जाएगा।इससे वेतन की समस्या हल हो जाएगी।

दिशा डहेरिया,सीएमओ, नगरपालिका परिषद वारासिवनी।

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