बालाघाट (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिला प्राकृतिक संपदा से समृद्ध है। जिले में जंगलों ने वन्य प्राणियों को संरक्षित किया है। वहीं दूसरी तरफ नदियों ने भी अपने तटों पर पक्षियों को पनाह दी है। जिले के जंगलों में जिस तरह अनुकूल वातावरण पर वन्य प्राणी बाघ और तेंदुए अपनी संख्या बढा रहे हैं। उसी तरह विशालकाय पक्षी सारस भी अपनी आबादी बढ़ा रहे हैं। वैनगंगा और बाघ नदी उनके के लिए जीवनदायिनी बन गई है। इन नदियों की गोद में सारम की वंशवृद्धि हो रही है। नवीन गणना में जिले में महाराष्ट्र के गोंदिया-भंडारा से अधिक सारस बालाघाट में हैं।जिला सारस के संरक्षण में ही नहीं उनकी संख्या को लेकर भी आगे है।

इस साल 11 जून से सारस की गणना शुरू की गई है। दो दिनों तक चली इस गणना में मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र में 26 टीमों ने सारस की गणना में हिस्सा लिया। अलग-अलग स्थानों पर सारस के घोसलों तक पहुंचकर पक्षियों की गणना में शामिल हुए विशेषज्ञों ने बताया है कि इस साल सारस के कुछ नए ठिकाने भी मिले हैं।इससे वंशवृद्धि के संकेत मिल रहे हैं।11 जून से शुरू हुई सारस गणना में सेवा संस्था गोंदिया,जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद व वन विभाग के अलावा वन्यजीव प्रेमियों ने भी हिस्सा लिया।

विलुप्ति की कगार पर सारस पक्षीः वर्तमान में विलुप्ति की कगार पर है। इसलिए यहां इनके संरक्षण के उपाय मित्रमान उनकी रक्षा भी कर रहे है। अब खेतों में सारस अपनी वंशवृद्धि कर पा रहे है।

कहां कितने स्थानों पर मिले मौजूदगी के निशानः सारस की गणना के दौरान गोंदिया में 80 से 90 स्थानों पर सारस की गणना की। बालाघाट में 60.70 स्थानों पर सारस की गणना की गई है।इस साल भी महाराष्ट्र के गोदिया-भंडारा जिले की तुलना में बालाघाट में अधिक सारस की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। यहां उनके संरक्षण के उपाय कारगर साबित हो रहे है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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