खैरलांजी (नईदुनिया न्यूज)।

जनपद पंचायत खैरलांजी की मोवाड़ पंचायत के डोंगरिया गांव में सेवा सहकारी समिति प्रांगण में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत निर्माण किए गए चबूतरे में गुणवत्ताहीन कार्य किया गया है। जिसके चलते एक माह में दाररें पड़ने लगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि बराबर मात्रा में तराई नहीं होने और मुरम, मिट्टी के भरण को रोलर से रोलिंग नहीं करने से चबूतरा निर्माण के कुछ दिनों बाद ही अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। रेत सीमेंट के प्लास्टर के साथ चूने की लाइनिंग कर इन दरारों को भरने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह भी नाकाफी साबित हो रहा है। 1308043 रुपये की लागत से बने इस घटिया निर्माण की शिकायत उपसरपंच गीता बाई सहारे सहित आधे सैकड़ा से अधिक ग्रामीणों ने कलेक्टर दीपक आर्य कर जांच की मांग की है।

उपसरपंच गीता बाई सहारे ने बताया कि छह जनवरी इसकी शिकायत कलेक्टर से की गई है। शिकायत की जांच के लिए आज तक कोई भी अधिकारी निर्माण स्थल पर जांच के लिए नही पहुंच पाया। निर्माण के समय भी उनके द्वारा निर्माण स्थल पर पहुंचकर निर्माण कार्य के तौर तरीकों पर सवाल किए गए मगर सरपंच सहित किसी भी कर्मचारी द्वारा इस बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। हालांकि उन्होंने इस बारे में निर्माण के समय लिखित शिकायत नहीं की थी और मौखिक रूप से ही समझाने का प्रयास किया गया जिसका नतीजा सबके सामने है। उन्होंने सभी जिम्मेदारों से सवाल करते हुए कहा कि यदि सब कुछ ठीक ठाक हुआ है तो फिर इतने जल्दी ही चबूतरे पर दरारें क्यों पड़ना प्रारंभ हो गई। चबूतरे धंसने लगा है साथ ही रोलिंग बिल्कुल भी नहीं की गई।

संदेह के घेरे में उपयंत्री की कार्यप्रणाली

ग्रामीणों ने बताया कि जब निर्माण बहुत अच्छा हुआ है तो फिर दरारें और प्लेटफार्म धंसकने कैसे लग गया। कहीं उपयंत्री ने इस कार्य की मॉनीटरिंग घर बैठे ही तो नहीं कर ली थोड़ी समझने वाली बात है आज क्षेत्र में स्थिति यह है कि निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाता है या समाप्ति की ओर होता है फिर भी उपयंत्री का निर्माण स्थल पर कोई अता पता नहीं होता या बहुत कम ही वे लोग जा पाते है। मगर इसका खामियाजा भी कभी-कभी निर्माण एजेंसी को ही भुगतना पड़ता है। निर्माण से लेकर समाप्ति तक किसी भी कार्य के तकनीकी पहलू के दिशा निर्देश की जिम्मेदारी उपयंत्री की होती है। वह ही इसके निर्माण के लिए जिम्मेदार होते है। फिर निर्माण अच्छा हो या बुरा इसका श्रेय भी उन्हें ही जाता है। कोई भी उपयंत्री केवल मूल्यांकन कम कर दूंगा कहकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकता। किसी कार्य का मूल्यांकन कम करना भी सवालिया निशान लगाता है कि उपयंत्री ने निर्माण एजेंसी को सही दिशा निर्देश नहीं दिए और समय पर इनके द्वारा निर्माण स्थल पर आकर नहीं देखा गया।

इनका कहना

निर्माण बिल्कुल सही हुआ है फिर जहां वहां दरारें कैसे पड़ गई। साथ ही चबूतरे की फ्लोरिंग नीचे कैसी धंस गई है। इसकी जानकारी ली जाएगी।

प्रवीण मेश्राम, उपयंत्री जनपद खैरलांजी।

हमें शिकायत प्राप्त हुई है। निर्माण के मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी उपयंत्री की होती है इस शिकायत की जांच करवाएंगे। दोषी पाए जाने पर दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

श्रुति चौधरी, सीईओ जनपद पंचायत खैरलांजी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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