बालाघाट/रामपायली। बालाघाट के रामपायली नगरी में मंगलवार की रात देशी घी के 108 टिपुर (दीपक) जलने के साथ ही कार्तिक पूर्णिमा पर्व का आगाज होगा। परंपरा के अनुसार मंगलवार की अलसुबह से ही कढ़ाई में पकवान बनाकर भगवान श्रीराम को भोग लगाया जाएगा। मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम के चरण पड़ने से पदावली (पहले का नाम) का नाम रामपायली हो गया। चंदन नदी किनारे मंदिर होने से रोजाना सूरज की पहली किरण श्रीराम के चरणों में गिरती है। एक और खास बात यह है कि यहां भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की प्रतिमाओं के लिए मुस्लिम परिवार कई वर्षों से वस्त्र बनाता आ रहा है। इसी परिवार के बनाए वस्त्र मंदिर के पुजारियों को पसंद आते हैं। मालूम हो कि हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन से यहां 7 दिनों तक चलने वाला मेला लगता है।

तीन पीढ़ियों से बना रहे वस्त्र

भगवान बालाजी के वस्त्रों को तीन पीढ़ियों से मुस्लिम परिवार बना रहा है। वर्तमान में आशिक अली (55) द्वारा वस्त्रों को तैयार किया जाता है। आशिक अली ने बताया है कि इससे पहले उनके दादा हबीब शाह द्वारा कपड़े बनाए जाते थे, उनका देहांत हो चुका है। उन्होंने कई वर्षों तक वस्त्र तैयार किए। इसके बाद इनकी जिम्मेदारी उनके पिता अहमद अली ने उठा ली। उन्होंने 60 वर्षों तक वस्त्र तैयार किए और वे स्वयं लगभग 34 सालों से लगातार वस्त्र बना रहे हैं। इसके लिए कच्चे माल पर लगने वाला व्यय भी वह खुद वहन करते हैं।

किले के रूप में बनवाया मंदिर

मंदिर के पुजारी रविशंकर दास वैष्णव बताते हैं कि चंदन नदी की ढोह में भगवान श्रीराम के वनवासी वेशभूषा वाली यह प्रतिमा मिली थी। इसे नीम के पेड़ के नीचे रख दिया गया था। इसके बाद नदी तट किनारे करीब 600 वर्षों पूर्व महाराष्ट्र राज्य के भंडारा जिले के तत्कालीन राजा मराठा भोसले ने मंदिर का एक किले के रूप में वैज्ञानिक ढंग से निर्माण करवाया था।

मंदिर में ऐसे झरोखे बनाए गए हैं कि सूर्योदय के दौरान सूरज की पहली किरण भगवान श्रीराम बालाजी के चरणों में पड़ती है। भारत के प्राचीन इतिहास में इस मंदिर के निर्माण का उल्लेख है। सन 1877 में तत्कालीन तहसीलदार स्वर्गीय शिवराज सिंह चौहान ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया।

वनवास के समय का जीवंत बोध करातीं तस्वीरें

भगवान श्रीरामचंद्र के 14 वर्षों के वनवास का जीवंत बोध कराने वाली तस्वीरों में भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनवास के दौरान रहन-सहन, ऋषि आश्रम का जीवन और शबरी को दर्शन दिए जाने से संबंधित दृश्य हैं। ये तस्वीरें स्वत: ही श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती हैं। श्रीराम मंदिर में प्रमुख सिद्ध मूर्ति बालाजी और माता सीता की है। भगवान राम की मूर्ति वनवासी रूप में है। सिर पर जूट और वामग में सीता का भयभीत संकुचित स्वरूप है। भगवान श्रीराम का बायां हाथ विराट राक्षस को देखकर भयभीत सीता के सिर पर उन्हें अभय देते हुए है।

इनका कहना है

हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन से 7 दिन-रात मेला लगता है। यहां मप्र के अलावा महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ राज्य सहित अन्य राज्यों के श्रद्धालु साल भर आते हैं। मंदिर में विराजित भगवान श्रीराम, माता सीता व लक्ष्मण के लिए अली परिवार द्वारा वस्त्र बनाए जाते हैं।

रविशंकर दास वैष्णव, श्रीराम मंदिर ट्रस्ट पुजारी रामपायली

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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