बालाघाट। नईदुनिया प्रतिनिधि। प्रदेश के छोटे किसानों को रबी व खरीफ के सीजन में फसल खराब होने पर अधिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में कई वे लोग फसल बीमा का प्रीमियम भी जमा नहीं कर पाते है। जिससे वे कर्ज न चुकाने के कारण डिफाल्टर घोषित कर कृषि के क्षेत्र में नुकसान उठाने के लिए मजबूर हो जाते है। इन किसानों को राहत पहुंचाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार राहत देने पर विचार कर रही है। सरकार से छोटे किसानों फसल बीमा कराने के बाद उनका प्रीमियम भी जमा करेगी। जिससे ये किसान समृद्ध हो सकेंगे और कर्ज के तले दबेगे नहीं। ये बातें चार नवंबर को बालाघाट प्रवास पर पहुंचे प्रदेश शासन के कृषि मंत्री कमल पटेल ने वार्ता के दौरान कहीं है।

प्रदेश में एक करोड़ 4 हजार किसान

कृषि मंत्री कहा कि मध्यप्रदेश में एक करोड़ 4 हजार किसान है पंजीकृत है। जिनका फसल बीमा रबी व खरीफ के सीजन में किया जाता है। जिससे आपदा की स्थिति निर्मित होने पर उनकी फसल का सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाता है, लेकिन ऐसी परिस्थिति में जो छोटे किसान है जिनकी संख्या में प्रदेश 86 लाख से अधिक है को कई बार नुकसान उठाना पड़ता है और वे फिर कर्ज नहीं चुका पाते है जिससे उन्हें डिफाल्टर होकर पंजीकृत किसानों की सूची से भी बाहर होना पड़ जाता है। ऐसे किसानों को प्रदेश सरकार लाभ देने की रणनीति बना रही है। अब सरकार ऐसे किसानों का पूरा प्रीमियम भरेगी जिससे इन किसानों को फसल बीमा का प्रीमियम भरना नहीं पड़ेगा।

खरीफ के सीजन में दो प्रतिशत व रबी के सीजन होता है डेढ़ प्रतिशत का बीमा

कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश में खरीफ के सीजन में किसान की फसल का बीमा दो प्रतिशत होता है और रबी के सीजन में डेढ़ प्रतिशत होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि फसल का 15 प्रतिशत बीमा होने दो प्रतिशत प्रीमियम किसान को देना होता है और 13 प्रतिशत सरकार को देना होता है। अब प्रदेश सरकार किसान के द्वारा दो प्रतिशत दिया जाने वाले प्रीमियम को भी किसान को जमा करने नहीं देगी और पूरा प्रतिशत का प्रीमियम सरकार स्वयं ही जमा करेगी। इस दौरान मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन, आयुष मंत्री रामकिशोर कावरे समेत अन्य भी मौजूद रहे।

Posted By: Jitendra Richhariya

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