Natural Farming: गुनेश्वर सहारे, बालाघाट। केंद्र और प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर रही है, लेकिन बालाघाट जिले के हट्टा-किरनापुर क्षेत्र के दर्जनभर गांवों के किसान करीब 15 साल से प्राकृतिक खेती का रुख कर चुके हैं। नीम उनकी फसल के लिए संजीवनी बन रही है। इसके औषधीय गुणों से फसलों में कीट और रोग नहीं लग रहे हैं। इस तरह नीम की छांव में फसल ही नहीं, किसान भी पनप रहे हैं। इन गांवों में 30 हजार एकड़ से अधिक रकबे में किसान नीम के बूते अपने खेतों की फसल कीटों के प्रकोप से बचा रहे हैं।

ऐसे मिला अनुभव : खैरगांव के किसान रमेश रनगीरे बताते हैं कि 15 साल पहले कीट के प्रकोप से खेत में लगी धान की फसल खराब हो गई थी। हालांकि दो नीम के पेड़ के नीचे की फसल में कीट नहीं लगे जिससे उतने हिस्से की फसल खराब होने से बच गई। यह नुकसान एक अनुभव दे गया। इसके बाद क्षेत्र के किसानों ने मेढ़ों में नीम का प्लांटेशन कर दिया। आज करीब 1100 नीम के पेड़ मेढ़ों में लगे हुए हैं।

फसलों के लिए सुरक्षा कवच : कृषि विज्ञानी डा. उत्तम बिसेन का कहना है कि नीम की छांव फसलों को कीट व रोग से बचाने में सहायक है। उसकी पत्तियों और निंबोली से किसान कीटनाशक बनाकर फसलों को भी कीट लगने से बचाते हैं। इससे उनकी भूमि की उर्वरक क्षमता बढ़ी है और फसलों का उत्पादन भी अच्छा हो रहा है। कवचहट्टा-किरनापुर क्षेत्र के सालेटेका, दहीगड़वा, मंगोलीखुर्द, नेवरगांव, खैरगांव, चिखला, खुरसोड़ी, नाहरवानी, खारा, दिगोधा, कन्हड़गांव समेत दर्जनभर गांव में नीम फसलों का रक्षा कवच बनी हई है।

वरदान है नीम : गुजरात के मास्टर ट्रेनर भावेश पटेल बताते हैं कि प्राकृतिक खेती के लिए नीम बेहद जरूरी है। उसकी पत्ती, फल और छांव भी वरदान हैं। नीम के पत्ते गिरने से खाद में परिवर्तित हो जाते हैं और इससे भूमि उपजाऊ होने से पैदावार भी अच्छी होती है।

इनका कहना है

खेतों में पाए जाने वाले हानिकारक कीटों जैसे दीमक, सफेद लट व सूत्र कृमि जैसे सूक्ष्म जीवों के नियंत्रण में नीम के पत्तियों का प्रयोग होता है। यदि खेतों की मेढ़ पर नीम के पेड़ हैं, तो ये किसानों के लिए लाभदायक हैं। इससे किसी भी फसल में कीट का प्रकोप नहीं होता है। नीम में एजाडिरैक्टीन नामक रसायन होता है जिसमें कीटनाशक और कवकनाशक के गुण होते हैं। इससे पेड़ के नीचे कीट और रोग नहीं पनपते हैं।

-डा. आरएल राउत, प्रमुख वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र बड़गांव।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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