गुनेश्वर सहारे, बालाघाट।

बालाघाट में परसवाड़ा तहसील के ग्राम सिलगी में सालों से 24 एकड़ जमीन पर डेढ़ साल में हरियाली लौट आई हैं। इस जमीन पर गांव के कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया था। राजस्व विभाग की मदद से सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाकर समूह की महिलाओं को बांस लगाने प्रेरित किया गया। पांच स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा हाइब्रिड प्रजाति टुंडा, कटंग व बालकुआ के छह हजार 616 पौधे लगाए गए। जिसमें सभी जीवित होने से पांच से छह फीट की ऊंचाई के हो गए है।अब बांस के बीचों-बीच में महिलाओं ने जुताई कराकर वहां सब्जियां उगाकर लाभ कमाएगी और आत्मनिर्भर बनेगी।

ग्राम संगठन अध्यक्ष लक्ष्‌मी तुरकर ने बताया कि सिलगी गांव में सरकारी जमीन पर सालों से अतिक्रमण की चपेट में थी।सरकार द्वारा अतिक्रमण हटवाकर पांच स्व-सहायता समूह की 52 महिलाओं को दिया गया है। इसमें मनरेगा योजना से तीन प्रजाति वाले बांस के पौधे डेढ़ साल पूर्व लगाए गए है। इनमें सिंचाई के लिए एक कुआ खनन कराया गया है। बांस के पौधे हाइब्रिड वाले होने से पांच से छह फीट ऊंचाई तक तैयार हो गए है। बांस की देखरेख करने का कार्य महिलाएं ही करती है।ये बांस तीन से चार साल में तैयार हो जाएंगे। जिनसे अगरबत्ती के लिए काड़िया, अगरबत्ती स्टीक, बांस सजावटी निर्माण में उपयोग करने के साथ शेष को बेच दिया जाएगा। इन बांस के बीच में खाली जमीन पर महिलाएं बैंगन, टमाटर, मिर्च, अदरक की खेती करेंगी। इसके लिए ट्रैक्टर से जुताई कराकर जमीन तैयार की जा रही है।

मवेशियों को बांस से बचाने लगवाई तार फेंसिंग

बांस को चोरी होने व मवेशियों से बचाने के लिए समूह की महिलाओं ने खुद 50 हजार रुपये खर्च कर तार की फेंसिंग लगवाई है।बांस तीन से चार साल में तैयार हो जाएंगे।इससे महिलाओं को अच्छी आमदानी मिलेगी। बांस को लगवाने का पूरा खर्च मनरेगा के जरिए दिया गया है।

इनका कहना

अतिक्रमण मुक्त जमीन को पांच स्व-सहायता समूह की 52 महिलाओं को बांस उत्पादन के लिए दिया गया है। बांस मनरेगा की तरफ से प्राप्त हुए है। इसमें तीन प्रजातियों के बांस लगाए है।इनसे अगरबत्ती की काड़ी निर्माण, अगरबत्ती स्टीक, बांस सजावटी करने में उपयोग ले सकेंगे। महिलाएं बांस के तैयार होते तक उनके बीचों में अनेक सब्जियों की खेती कर लाभ अर्जित करेंगी।वहां पर ट्रैक्टर से जुताई का कार्य शुरू कर दिया गया है।

संदीप चौरसिया

ब्लाक प्रबंधक, मप्र डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन परसवाड़ा।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close