बालाघाट (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अपने लिए तो सभी जीते हैं,जीना तो वही है जो जिया जाए औरों के लिए, ये बातें युवाओं में जोश भरती हैं। कुछ युवा इसे चरितार्थ भी कर रहे हैं। उनने रक्तदान कर लोगों की जिंदगी बचाने का संकल्प लिया है। यहां हम कुछ ऐसे ही युवाओं का जिक्र कर रहे हैं, जिनके संकल्प के आगे मजहब दीवार भी रोड़ा नहीं बनती।

बालाघाट निवासी युवक सोहेल शेख 31 की उम्र में 14 बार तो सरफराज खान ने 36 साल की उम्र में 32 बार रक्तदान किया है। इसी तरह रजेगांव निवासी युवक हितेश अजीत ने सात साल में सात बार रक्तदान किया है, इसने रक्तदान भले ही कम किया है, लेकिन उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति बनी हुई है। वह साल में दो रक्तदान शिविर का आयोजन कर रक्तदान के लिए लोगों को प्रेरित कर रहा है। अब तक उसने दो हजार लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर दो हजार यूनिट से अधिक रक्तदान कराया है। उसने अपना परिवार ग्रुप बनाकर रक्तदाताओं की बड़ी चैन बनाई है। इससे करीब दो सौ युवा जुड़े हैं। जो जरूरतमंदों को रक्तदान कर उनकी जिंदगी बचाते हैं।

इसी प्रकार किरनापुर जनपद की पाथरी पंचायत में रहने वाले पन्नाा लाल नगपुरे में रक्तदान करने का जुनून देखते ही बनता है।वह आधी रात को भी खबर मिले तो रक्त देने चले जाते हैं। वे 21 बार रक्तदान कर चुके हैं।पहली बार जम्मू में एक जवान के आतंकी हमले में घायल होने पर पहली बार रक्तदान कर उसकी जान बचाई थी।तब से तत्पर होकर जरूरतमंद को रक्तदान कर मदद कर रहे हैं।

रक्त बैंक में बनी रहती है कमीः रक्त इकाई में कुछ युवाओं की जागरुकता के बाद भी अन्य लोगों में जागरुकता न होने के कारण रक्त की कमी बनी हुई हैं। इस इकाई में माह में रोजाना 30 यूनिट अलग-अलग ग्रुप लगते हैं, जो मरीजों को चढ़ाए जाते है, लेकिन यहा' ए' पाजिटिव रक्त सिर्फ दो यूनिट जबकि 30 यूनिट की उपलब्धता होना चाहिए इसी प्रकार 'बी' पाजिटिव 14 यूनिट, 'बी' निगेटिव शून्य, एबी पल्स 3 यूनिट, एबी माइनस एक यूनिट, ओ निगेटिव शून्य व ओ पाजिटिव रक्त की 40 यूनिट की उपलब्धता है।

31 की उम्र में किया 14 बार रक्तदानः वार्ड क्रमांक तीन शांति नगर निवासी युवक सोहेल शेख की उम्र महज 31 साल है, लेकिन जरुरतमंदों की मदद करने की उनकी सोच कुछ ऐसी है कि वह उन्हें जानकारी मिलते ही वे बिना जान-पहचान पूछे ही रक्तदान करने शहीद भगत सिंह जिला अस्पताल की रक्त बैंक पहुंच जाते हैं।रक्तदान का दान कर जरुरतमंदों की मदद करते हैं।अब तक 14 बार रक्तदान कर मानव सेवा का कार्य किया है। उन्होंने बातचीत में बताया कि उन्हें एक बार रक्त की अवश्यकता पड़ी तो उन्हें रक्त के लिए काफी परेशान होना पड़ा था ।तब से ही मन में ठाना की रक्तदान करने से लोगों को मदद मिलेगी। इसके लिए किसी को परेशान नहीं होना पड़ेगा।ऐसे ही और भी अन्य युवा है, जो रक्तदान के लिए तत्पर रहते है।

बालाघाट रजा नगर निवासी सरफराज खान बताते हैं कि 36 साल की उम्र में 32 बार रक्तदान कर चुके हैं।छात्रवाहिनी में सक्रिय सदस्य के रुप में समाज सेवा की दिशा में आगे कदम बढ़ाया तो फिर पीछे नहीं हटे, रक्तदान कर जरूरतमंदों की मदद करने का संकल्प लिया है। इस संकल्प के आगे कभी मजहब रोड़ा बना है। अपना संकल्प पूरा करने तत्पर रहते हैं।

इनका कहना....

जिला अस्पताल की रक्त ईकाई में जिले के विभिन्ना प्रकार की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अलग-अलग ग्रुप का रक्त चढ़ाया जाता है और कई बार बिना डोनर के भी रक्त चढाया जाता है। रक्त बिना रक्तदात एकत्रत नहीं किया जा सकता है। इसके प्रति ही लोगों को जागरुक करने के लिए विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाता है बावजूद इसके रक्तदान के प्रति जागरुकता की कमी होने के चलते ही रक्त ईकाई में रक्त की कमी बनी हुई है।

-श्यामा घालेकर रक्त इकाई, परामर्श दाता।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close