श्रवण शर्मा बालाघाट

बाढ़े पूत पिता के कर्मों, ये बातें यूं नहीं कही गई हैं, इनके अपने कुछ मायने हैं, जो न केवल लोगों को प्रेरित करती हैं। बल्कि पिता के कर्म की कड़ी से बच्चों का भविष्य भी गढ़ती हैं। पिता ही सफलता की अहम बुनियाद है। कुछ ही ऐसी कहानी है, मधुकर लांजेवार की, जिनने एक छोटी से ब्रेड पकोड़े की दुकान के दम पर अपने बेटे को अच्छी शिक्षा दिलाकर डाक्टर बना दिया। पिता के संघर्ष और मां की उम्मीदों को सार्थक करने बेटे ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। हालात जरूर हौंसला डिगाते रहे, लेकिन पिता का सपना पूरा करने की जिद ने जीवन को सफल मुकाम तक पहुंचा दिया। मुधकर लांजेवार की उम्मीद को तब पंख लगे, जब साल 2013 में बेटे ने डाक्टरी की पढ़ाई पूरी कर ली। खैरलांजी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से संविदा आधार पर चिकित्सा सेवा शुरू करने के बाद डाक्टर अरूण लांजेवार ने वारासिवनी के सिविल अस्पताल में भी अपनी सेवाएं दी। साल 2014-15 में पीएससी की परीक्षा में सफलता मिलने के बाद बालाघाट जिला अस्पताल में नियुक्ति हुई। वर्तमान में आरएमओ के रुप में सेवाएं दे रहे हैं।

बेटे की सफलता ही जीवन भर की कमाईः अपने बेटे की सफलता को लेकर मधुकर लांजेवार कहते हैं कि बिना परिश्रम के सफलता नहीं मिलती। उसके लिए तपना पड़ता है। सोना आग में तपकर ही खरा होता है, गरीबी भी उम्मीद की आग होती है।इसमें तपकर लोग सफल मुकाम पाते हैं। जीवन की विषम परिस्थितियों में बेटे की पढ़ाई लिखाई में कमी नहीं रखी। अच्छी शिक्षा दिलाई अब वह डाक्टर बन गया है। उसकी सफलता ही जीवन भर की कमाई है।

अस्पताल की तकलीफों ने प्रेरित कियाः मधुकर लांजेवार का बेटा अरूण लांजेवार जिला अस्पताल में आरएमओ हैं,और बहू अनीता भी डाक्टर हैं।जिस अस्पताल में लाइन लगाकर भटक-भटकर अरूण लांजेवार ने इलाज कराया है,आज उसी अस्पताल में लोगों का इलाज कर रहे हैं।यहां की तकलीफों ने उन्हें डाक्टर बनने के लिए प्रेरित किया।अस्पताल के लिए कोई मरीज और उसके स्वजनों को भटकना न पड़े इसके लिए वह ज्यादा समय अपनी सर्विस को देते हैं,निजी प्रैक्टिस नहीं करते हैं।

पिता की सीख बनी सफलता का सूत्रः अरूण लांजेवार बताते हैं कि जब कभी हालातों को देखकर मन पीछे करता तो मां संबल बढ़ाती रहीं और पिता भी उम्मीद बढ़ाते गए पहली बार में पीएमटी की परीक्षा में सफल नहीं हुए,तो लगा कि मुझे भी दुकान ही देखनी पड़ेगी,लेकिन पिता ने दृढ़ इच्छा से प्रयास करने से सफलता मिलती है। उन्होंने कहा कि तुम्हे पास एक और आखरी मौका है। इतनी सी सीख जीवन की सफलता का सूत्र बन गई । फिर कड़ी मेहनत की और चूके नहीं चयन हुआ,तो जबलपुर से नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कालेज से पढ़ाई एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर बालाघाट में सेवाएं शुरू की। संविदा आधार खैरलांजी व वारासिवनी में सेवाएं दी,पीएससी निकालकर जिला अस्पताल में सेवाएं देना शुरु किया,वर्तमान में आरएमओ के पद पर सेवाएं दे रहे हैं।

ऐसे जानें पारिवारिक पृष्ठभूमिः अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के संबंध में मधुकर लांजेवार बताते हैं कि वह हट्टा केशलेवाड़ा के रहने वाले हैं,शादी के बाद परिवार बढ़ा तो गुजारे की गरज से पत्नी के साथ शहर चले आए। छोटी सी ब्रेड पकोड़े बनाने की दुकान खोलकर बच्चों का पालन-पोषण किया।दो बेटियां और एक बेटा है। बेटियों को पढ़ाकर उनकी शादी कर दी और बेटे को ब्रेड पकोड़े बेचकर डाक्टर बना दिया। उनकी इस मेहनत को पत्नी भी सींचती रही।कदम से कदम मिलाकर जीवन संगिनी के साथ ने बेटे को डाक्टर बनाने पूरा साथ दिया, बेटे ने भी जी तोड़ मेहनत कर सफलता पाकर सपना साकार किया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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