बालाघाट (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हसन हुसैन की शहादत का पर्व मोहर्रम आज जिला मुख्यालय सहित देश व पूरी दुनिया में मनाया गया। जहां पूरे दिन विभिन्ना कार्यक्रमों के आयोजन किए गए। यौमे आशुरा के नाम से जाने वाले इस खास दिन में मुस्लिम धर्मावलंबियों द्वारा आशूरा की विशेष नमाज मस्जिदों व घरों में अदा की गई। इसके अलावा जगह जगह ताजि, निकालकर अखाड़े का आयोजन कर, जगह-जगह लंगर ए आम, खिचड़ा, शरबत आदि का तक्सीम कर शहीदाने कर्बला को याद किया गया। इस विशेष दिन पर प्रति वर्ष के अनुसार इस वर्ष भी वार्ड क्रमांक दस इमामबाड़े, वार्ड क्रमांक तीन से ताजिया निकाला गया। तो वहीं हक्कू साहब बाबा दरबार से शाही संदल निकाल कर शहर का गस्त कराया गया। जिसमें भरवेली सहित अन्य जगहों के संदल और ताजिए शामिल हुए।इसके अलावा मुस्लिम समाज के लोगो ने आज के इस खास दिन में यौमे आशूरा का रोजा रख विशेष इबादत की वही लोगो ने कब्रिस्तान पहुंचक़र अपने मरहुमीन और बुजुर्गो को याद किया। वही जगह- जगह लंगर खिचड़ा वितरण अन्य कार्यक्रम संपन्ना कराए गए। इसके आलावा घर घर शरबद खिचड़ा का वितरण कर शहीदाने करबला को याद किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आशुरा के दिन का ऐतिहासिक महत्व है। यौमे आशुरा इस्लामिक तारीख के मुताबिक बहुत ही फजीलत और अजमत वाला दिन है क्योंकि यौमे आशुरा के दिन ही हजरत आदम की दुआएं कबूल हुई इसी दिन हजरत नूह की कश्ती जूदी पहाड़ी के किनारे लगी। इसी दिन हजरत इब्राहिम पर आग गुलजार हुई इसी दिन हजरत ईसा आसमान पर उठा लिए गए और इसी दिन हजरत ईमाम हुसैन की कर्बला में शहादत हुई थी।

इंसानियत को बचाने पेश की थी कुर्बानीः इस्लामिक साल के पहले माह मोहर्रम की दस तारीख को पूरी दुनिया में यौमे अशुरा के रूप में मनाया जाता है। जिसमें विशेषकर हजरत इमाम हुसैन उनका परिवार और उनके साथी जिन्होंने कर्बला के मैदान में धर्म और इंसानियत को बचाने के लिए अपनी कुर्बानी पेश की थी। जिनकी याद में यौमे अशुरा के दिन खिचड़ा और शर्बत बांटा जाता है और यतिमो व बेहसहारों की मदद की जाती है।

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