वारासिवनी (नईदुनिया न्यूज)। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की पहली मुख्य प्रशासिका यज्ञ माता जगदंबा सरस्वती जिन्होंने वात्सल्य की देवी बनकर संस्था का कारोबार बहुत प्यार से संभाला था।अलौकिक मां बनकर ईश्वर के प्रति बहुत ही समर्पित रही। संसार में ऐसी लाखों महिलाएं हैं जिनकी गाथाएं आप सभी ने सुनी होगी, लेकिन मातेश्वरी जी की गाथाओं में एक अद्भुत बात हैं। मम्मा ने अपनी त्याग तपस्या से ईश्वर को भी अपना बना लिया।ऐसी महान तपस्वी मम्मा का 57वां स्मृति दिवस के उपलक्ष में साधना भवन वारासिवनी सेवा केंद्र में कार्यक्रम बड़ी ही शांतिपूर्वक मनाया गया।

संस्था की संचालिका उर्वशी दीदी ने कहा कि दया करुणा के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण बहुत जरूरी हैं।जब तक सेवा भाव नहीं होगा हमारे मन में दया की भावना जागृत हो नहीं सकती। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में मीना रामचंदानी,मीना रिजवानी,रामकली टेकाम,रोशनी ठाकरे उपस्थित रहे। मम्मा ने अपनी त्याग तपस्या से ईश्वर को भी अपना बना लिया।ऐसी महान तपस्वी मम्मा का 57वां स्मृति दिवस के उपलक्ष में साधना भवन वारासिवनी सेवा केंद्र में कार्यक्रम बड़ी ही शांतिपूर्वक मनाया गया।

संस्था की संचालिका उर्वशी दीदी ने कहा कि दया करुणा के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण बहुत जरूरी हैं।जब तक सेवा भाव नहीं होगा हमारे मन में दया की भावना जागृत हो नहीं सकती। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में मीना रामचंदानी,मीना रिजवानी,रामकली टेकाम,रोशनी ठाकरे उपस्थित रहे।

दया मनुष्यों पर नहीं सभी प्राणियों पर करनी चाहिएः इन्होंने अपनी-अपनी वाणी में कहा कि दया मनुष्य पर नहीं। लेकिन सभी प्राणियों पर करना चाहिए।इसके बाद सभी अतिथियों ने मातेश्वरी को पुष्पांजलि,दीपांजली और अपनी भावांजलि अर्पित की। ब्रम्हाकुमारी जयश्री दीदी ने मातेश्वरी जगदंबा की जीवन कहानी सुनाई और सभी को अपनी वाणी से भाव विभोर कर दिया।उन्होंने कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों और सभी भाई बहनों का आभार व्यक्त किया।इसके बाद सभी को स्मृति दिवस का भोग खिलाया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close