बालाघाट, नईदुनिया प्रतिनिधि। 15 अगस्त 1947 को भारत देश को आजादी मिलने के ठीक एक दिन पहले 14 अगस्त को देश का सबसे बड़ा बंटवारा हुआ था और भारत का एक बड़ा हिस्‍सा अलग कर पाकिस्तान बना दिया गया था। इस दिन देश के लाखों लोगों को हिंसा का शिकार होना पड़ा था। निर्दयता की ये पराकाष्ठा रही कि लोगों को अपने घरों तक को छोड़ना पड़ गया। देश के इस परिदृश्य को आज की पीढ़ी जान सके और दुख भरी दास्तान से अवगत हो सके इस उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत ही गुरुवार को प्रधान डाकघर में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्कृति विभाग द्वारा उस परिदृश्य की उपलब्ध कराई की चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ आयुष मंत्री रामकिशोर कावरे, नगर पालिका अध्यक्ष भारती सुरजीत सिंह ठाकुर के हाथों से किया गया।

दर्द उतर आता है ह्दय में

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर आयुष मंत्री ने कहा कि हम आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे है, लेकिन हमें यह भी याद रखना होगा और उस स्थिति की वस्तुस्थिति से भी अवगत होना पड़ेगा कि किस तरह से आजादी के एक दिन पूर्व ही बंटवारा होने से देश में ऐसे हालात उत्पन्न हुए थे। उन्होंने कहा कि ह्दय में दर्द उतर आता है जब वह क्षण याद आता है कि हमारे ही देश के भाई-बहनों को असहनीय दर्द सहन करना पड़ा था।

युवा पीढ़ी के साथ ही बड़ों को भी नहीं पता वस्तुस्थिति

14 अगस्त 1947 के दिन देश में बंटवारे के चलते क्या और कैसे हालात उत्पन्न हुए है इसकी वस्तुस्थिति से युवा पीढ़ी ही नहीं बल्कि बहुत से ऐसे बुजुर्ग लोग भी हैं, जिन्हें जानकारी नहीं है। इसी बात को ध्‍यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने इस बंटवारे की पीड़ा और दर्द से परिचय कराने के हर वर्ष विभाजन विभीषिका दिवस मनाने का निर्णय लिया गया है और सच्चाई से परिपूर्ण प्रदर्शनी भी लगाई गई। वहीं इस अवसर पर प्रधान डाक घर के संभागीय अधीक्षक जेके कावड़े ने बताया कि यह प्रदर्शनी आगामी 14 अगस्त तक प्रदर्शित की जाएगी। इसमें बंटवारे के दौरान किस तरह की परिस्थितियां निर्मित हुई थीं और लोगों को क्या-क्या सहना पड़ा था को प्रदर्शित किया गया है।

Posted By: tarunendra chauhan

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close