बड़वानी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिला न्यायालय सहित तहसील न्यायालयों में शनिवार कोनेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में 2035 प्रकरणों का निराकरण किया गया।इ समें तीन करोड़ 46 लाख 51 हजार 249 रूपये का अवार्ड पारित हुआ। लोक अदालत में 2661 लोग लाभान्वित हुए।

जिला न्यायालय में शनिवार को प्रधान एवं जिला सत्र न्यायाधीश आनंद कुमार तिवारी की अध्यक्षता में लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं न्यायाधीश अमितसिंह सिसोदिया के अनुसार नेशनल लोक अदालत में प्रीलिटिगेशन के 12188 प्रकरण रखे गए थे। इनमें से 1769 प्रकरणों का निराकरण हुए और उनमें 56 लाख 89 हजार 619 रुपये का अवार्ड पारित हुआ है। पेडिंग प्रकरण 2203 प्रकरण रखे गए थे। इनमें से 266 प्रकरणों का निराकरण होकर उनमें दो करोड़ 89 लाख 61 हजार 630 रुपये का अवार्ड पारित किया गया।

'आपसी सौहार्द बना रहता है'

जिले में लोक अदालत का शुभारंभ जिला न्यायालय परिसर में प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश आनंद कुमार तिवारी, कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा, पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला, विशेष न्यायाधीश जाकिर हुसैन द्वारा किया गया। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव न्यायाधीश अमित सिंह सिसोदिया, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सोहन पाटीदार, न्यायाधीश, विभिन्ना विभागों के अधिकारी, अभिभाषक बड़ी संख्या में पक्षकार उपस्थित थे। शिविर का शुभारंभ करते हुए प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश आनंद कुमार तिवारी ने बताया कि लोक अदालतें त्वरित, सुलभ न्याय के अच्छे माध्यम है। इन अदालतों में निराकृत प्रकरणों से पक्षकारों के मध्य आपसी सौहार्द बना रहता है। क्योंकि विवाद का निराकरण आपसी समझौते से किया जाता है।

फिर एक हुए दंपती न्यायाधीश ने कहा : कुछ मामले पति-पत्नी व पारिवारिक विवादों के रहे, जिन्हें मध्यस्थता से सुलझाया गया। ग्राम तुलन निवासी आशाबाई व उसके पति राकेश के मामले में आवेदिका उसके मायके गई थी। उसने बच्चों को बस में बिठाकर ससुराल पहुंचा दिया। इसी बात पर पति-पत्नी का मन मुटाव हो गया। दोनो ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। उक्त प्रकरण प्रधान एवं जिला सत्र न्यायाधीश आनंद कुमार तिवारी के संज्ञान मे आने पर उन्होंने अधिवक्ताओं कि उपस्थिति में दोनों पक्ष को समझाइश दी। दंपती का सात वर्षीय बालक समझाइश के दौरान माता-पिता के साथ उपस्थित था। न्यायाधीश ने कहा कि बालक का सर्वोपरी हित उसके माता-पिता के साथ होता है। बालक के हित को ध्यान में रखते हुए माता-पिता को समझाया।

उनके प्रयास सफल हुए। समझाइश के बाद दोनों पद्वा वैवाहिक संबंध के पुनःस्थापना के लिए राजी हुए। । आपसी राजीनामा के आधार पर प्रकरण का सफल निराकरण हुआ। न्यायाधीश द्वारा मिठाई एवं बच्चे को चॉकलेट दी गई।

पौधे देकर घर भेजा

सेंधवा न्यायालय मे लोक अदालत का शुभारंभ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सेंधवा विजय सिंह कावछा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश

सेंधवा रूपेश नाइक, न्यायिक मजिस्ट्रेट सेंधवा संजोग सिंह वाघेला, न्यायिक मजिस्ट्रेट सेंधवा नगिना मरावी एवं अभिभाषक संघ सेंधवा के अध्यक्ष जितेंद्र पालीवाल द्वारा किया गया। इस दौरान विद्युत विभाग के कार्यपालन यंत्री सेंधवा अनंत कुमार अहिरवार, सहायक यंत्री सेंधवा गंगाराम बडोले, नगर पालिका एवं विभिन्ना बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।न्यायाधीशों ने कहा कि नेशनल लोक अदालत लगाने का उद्देशय प्रकरणों का निराकरण समझौतों के माध्यम से करना है। आपसी समझौते से परस्पर सद्भावना बढ़ती है। लोक अदालत एक सरल व सशक्त माध्यम है। ऐसे अवसर का लाभ अधिक से अधिक लेना चाहिए। पौधों का वितरण भी किया गया।

पति-पत्नी के विवाद को सुलझाया

राजपुर में विविध प्रकरणों का निराकरण हुआ, वहीं पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद को समझौते से दूर किया, जिससे वे फिर एक हुए। व्यवहार न्यायाधीश नीरज कुमार सोनी के समक्ष ये प्रकरण आया और समझाइश के बाद दंपति फिर एक हुए। यह प्रकरण अधिवक्ता रामलाल रेवाल एवं आरके सत्संगी के माध्यम से सुलझाया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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