*रोजगार गारंटी योजना और प्रशासन पर सवालिया निशान

*सेंधवा, निवाली, पलसूद, पाटी, खेतिया व पानसेमल क्षेत्र से प्रतिदिन हजार ग्रामीण कर रहे पलायन

रमन बोरखड़े

सेंधवा। नईदुनिया न्यूज

जिले से एक बार फिर काम की तलाश में बड़ी संख्या में पलायन शुरू हो चुका है। पंचायतों में काम नहीं मिलने, खेती के लिए पानी नहीं होने और अन्य प्रदेशों में ज्यादा मजदूरी मिलने के चक्कर में जिले के सेंधवा, निवाली, पलसूद, पाटी, खेतिया, पानसेमल क्षेत्र से प्रतिदिन करीब एक हजार ग्रामीण काम के लिए पलायन कर रहे हैं। ऐसे में गांव खाली होकर वीरान होने लगे हैं। यहां से ग्रामीण गुजरात, महाराष्ट्र और अन्य प्रदेशों में जा रहे हैं।

पलायन को लेकर सुबह से दोपहर तक शहर के बायपास स्थित पुल पर ग्रामीण परिवारों की भीड़ दिखाई देती है। वहीं शाम से रात 11 बजे तक शहर के पुराना बस स्टैंड, सिनेमा चौक और अन्य स्थानों पर ग्रामीणों का मेला लगा रहता है। पलायन कर रहे ग्रामीण इसे मजबूरी बताते हैं तो कुछ इसे जरूरत का नाम दे रहे हैं। भोंगर्या और होली के बाद से काम के लिए हजारों की संख्या में प्रतिदिन हो रहा पलायन देखकर बरबस सवाल उठता है कि आखिर रोजगार की गारंटी कहां है? दोपहर में शहर के सिनेमा चौराहे पर महाराष्ट्र जाने वाले सेंधवा, निवाली, पानसेमल और राजपुर क्षेत्र के मजदूरों ने बताया कि हमारे क्षेत्र में काम नहीं मिलने से हमें महाराष्ट्र जाना पड़ता है।

पुराना बस स्टैंड पर परिवार के साथ बस की तलाश में खड़े पलसूद क्षेत्र के मेणीमाता निवासी परसिया पिता किशन ने बताया कि गांव में काम नहीं मिलता है। इसलिए परिवार सहित महाराष्ट्र के नाशिक काम करने जा रहा हूं। वहां बांध निर्माण में मजदूरी पर पुरुष को 300 और महिला को 250 रुपए प्रतिदिन मेहनताना मिलता है। गांव में खेती है, लेकिन सिंचाई सुविधा नहीं है। इसी प्रकार पलसूद क्षेत्र के ग्राम मटली निवासी पठान पिता मालसिंह ने बताया कि गांव में काम का बहुत कम मेहनताना मिलता है। फसल काटने पर 120 रुपए रोज मिलता है। इतने कम रुपयों में गुजारा संभव नहीं। पूना जा रहा हूं। वहां मजदूरी के 300 रुपए रोज मिलते हैं।

आधा गांव हो गया खाली

सेंधवा जनपद के ग्राम मेंदलियापानी में 2 हजार 150 लोग रहते हैं। यहां रोजगार को लेकर करीब आधा गांव महाराष्ट्र व गुजरात पलायन कर गया है। सरपंच पुत्र गुच्छा जमरे ने बताया कि मनरेगा में निरंतर काम नहीं मिलना, कम मजदूरी मिलना और समय पर मजदूरी नहीं मिलने के कारण गांव की आधी आबादी काम के लिए पलायन कर गई है। घरों पर ताले लगे हैं।

बच्चों की शिक्षा अधर में

उल्लेखनीय है कि खानाबदोशों की तरह रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटकने वाले इन परिवारों के साथ इनके बच्चों का जीवन भी अंधकारमय हो रहा है। अपने माता-पिता के साथ गांव से शहर और शहर से गांव आने-जाने के कारण इन मजदूरों के बच्चे उचित शिक्षा नहीं प्राप्त कर पाते हैं। स्थानीय ट्रैवल्स संचालक कीर्ति ठक्कर ने बताया कि प्रतिदिन जिलेभर के एक हजार ग्रामीण पलायन कर रहे हैं।

काम दिया दे रहे

जिलेभर की जनपद क्षेत्र में पंचायतों में रोजगार गारंटी में काम दिए जा रहे हैं। सब को काम मिल रहा है। इस वर्ष मजदूरी बजट शत प्रतिशत पूर्ण हो गया है। राशि भी पर्याप्त है। मजदूरों को समय पर मजदूरी दी जा रही है। कई ग्रामीणों को 100 दिन का रोजगार मिल चुका है।

-सुनील द्रविड़, जिला अधिकारी

ग्रामीण रोजगार गारंटी, बड़वानी

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